भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर और दिसंबर की मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू में नीतिगत ब्याज दर में 0.250.25 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है. विश्लेषकों का कहना है कि खुदरा महंगाई के आगे और बढ़ने तथा ऊंचे स्तर पर बने रहने की आशंका के बीच केंद्रीय बैंक नीतिगत दर रेपो में वृद्धि कर सकता है. विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में नए सिरे से तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत का फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचना, अल नीनो की चिंता और इसके और तेज होने की आशंका को देखते हुए रिजर्व बैंक ब्याज दर बढ़ा सकता है. इतना ही नहीं, अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ब्याज दर बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ने से भारत और अमेरिका के बीच ब्याज दर का अंतर घटने की संभावना तथा मजबूत आर्थिक वृद्धि भी आरबीआई को नीतिगत दर में वृद्धि के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं. यह अनुमान खुदरा महंगाई के आंकड़ों के एक दिन बाद आया है. आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई अगस्त में बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी.

डॉयचे बैंक और एसबीआई का अनुमान
जर्मनी की ब्रोकरेज कंपनी डॉयचे बैंक के विश्लेषकों ने एक रिपोर्ट में कहा कि कच्चे तेल की कीमत एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है. ऐसे में रिजर्व बैंक के लिए खासकर तब जब पश्चिम एशिया संकट के बावजूद आर्थिक वृद्धि काफी मजबूत बनी हुई है, नीतिगत दर में वृद्धि शुरू करने का समय आ गया है. ब्रोकरेज कंपनी ने कहा कि उसने ब्याज दर बढ़ाने का अनुमान दिसंबर से खिसका कर अक्टूबर कर दिया है. अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के ब्योरे में कड़े रुख, महंगाई का बढ़ना, मजबूत आर्थिक वृद्धि और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के बाद उसने यह बदलाव किया है. देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक के अर्थशास्त्रियों ने कहा कि खुदरा महंगाई 6.5 प्रतिशत के स्तर को पार कर सकती है और 2027 की शुरुआत में घटकर छह प्रतिशत से नीचे आ सकती है. ऐसे में अक्टूबर और दिसंबर में मौद्रिक नीति समिति की बैठकों में नीतिगत दर रेपो में 0.250.25 प्रतिशत बढ़ाना और उसके बाद वृद्धि पर विराम लगाना उचित होगा.
एचएसबीसी ने भी लगाई मुहर
विदेशी ब्रोकरेज कंपनी एचएसबीसी ने भी अक्टूबर और दिसंबर में दो बार नीतिगत दर बढ़ाने का अनुमान जताया है. उसका कहना है कि महंगाई लगातार नौ महीने तक पांच प्रतिशत से ऊपर रह सकती है. डॉयचे बैंक का मानना है कि रिजर्व बैंक फरवरी, 2027 में दर बढ़ाने को लेकर विराम लेगा और उसके बाद अप्रैल तथा जून, 2027 की समीक्षाओं में फिर ब्याज दर बढ़ाएगा. इससे मौजूदा दर वृद्धि चक्र में कुल बढ़ोतरी एक प्रतिशत तक पहुंच सकती है. यह चक्र अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है. उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने एक साल से अधिक समय से नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया है. बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देने की दर यानी रेपो दर फिलहाल 5.25 प्रतिशत है. रेपो दर वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को तात्कालिक जरूरतों के लिए अल्प अवधि के लिए कर्ज देता है.
फेड भी कर सकता है इजाफा
डॉयचे बैंक ने कहा कि पिछली मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू का बयान नरम रुख वाला था, इसलिए उसे दिसंबर से दर बढ़ोतरी शुरू होने की उम्मीद थी. लेकिन बैठक के ब्योरे में छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति का कड़ा रुख सामने आने और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की संभावित दर बढ़ोतरी को देखते हुए उसने अक्टूबर में दर बढ़ाने का अनुमान लगाया है. ब्रोकरेज कपनी के अनुसार, अमेरिकी केंद्रीय बैंक सितंबर, दिसंबर और मार्च के अंत में होने वाली बैठकों में प्रमुख ब्याज दर में 0.250.25 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है. उसने कहा कि पूंजी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए भारत और अन्य देशों के बीच ब्याज दरों के अंतर का महत्व है. एशिया के कुछ केंद्रीय बैंक पहले ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर चुके हैं.
डॉयचे बैंक ने कहा कि रिजर्व बैंक की चुनौती अब मुख्य रूप से आपूर्ति से पैदा हुई महंगाई के झटके से निपटने से बदलकर ऐसे वैश्विक माहौल में वास्तविक ब्याज दर की विश्वसनीयता फिर से कायम करने की होगी, जहां मौद्रिक नीतियां अधिक सख्त हो रही हैं. ब्रोकरेज कंपनी ने कहा कि नकदी वापस लेने के लिए खुले बाजार के परिचालन की घोषणा के बाद अगला कदम ब्याज दरों में बढ़ोतरी का होगा.