भगवान कृष्ण की रास स्थली वृंदावन में ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर के करीब 200 किलो वजनी चांदी के रथ का विवाद गहराता नजर आ रहा है. इस बार रथयात्रा में इस रथ को शामिल नहीं किया गया था. इसके बाद रथ गायब होने की शिकायत हुई और अब इस मुद्दे पर मंदिर प्रबंधन और सेवायतों के बीच संग्राम शुरू हो गया है. मामला पुलिस और प्रशासन तक भी पहुंच गया है.

स्थिति को देखते हुए हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी ने एक जांच समिति का गठन किया था. इसके बाद रविवार को सीओ वृंदावन संदीप सिंह और अपर नगर मजिस्ट्रेट रामप्रसाद त्रिपाठी ने पुलिस बल के साथ सेवायत गोस्वामी ज्ञानेंद्र गोस्वामी और बृजेन्द्र किशोर गोस्वामी की गद्दी पर पहुंचकर जांच पड़ताल की. इस दौरान अधिकारियों ने चांदी का रथ और उससे जुड़ी सामग्री दिखाने को कहा, लेकिन सेवायतों ने लिखित नोटिस के बिना सामग्री दिखाने से मना कर दिया.
बाद में प्रशासन ने जारी किया नोटिस
सीओ वृंदावन और नगर मजिस्ट्रेट के बैरंग वापस लौटने के बाद प्रशासन ने विधिवत नोटिस जारी किया और सेवायतों से चांदी की सामग्री की सुरक्षा, दान की रसीदें, रथ के मालिकाना हक और वर्तमान स्थान से संबंधित जानकारी डिटेल में मांगी. बताया जा रहा है कि जिस रथ को गायब बताया जा रहा है, उसमें करीब 160 किलो चांदी लगी है. वहीं लकड़ी और अन्य सामग्री मिलाकर इसका कुल वजन करीब 200 किलो बताया जा रहा है.
मालिकाना हक पर विवाद
इस रथ को लेकर सेवायत ज्ञानेंद्र गोस्वामी का दावा है कि यह मंदिर की संपत्ति है ही नहीं, बल्कि उनके पिता द्वारा बनाए गए ट्रस्ट को यजमानों की ओर से दान किया गया था. उन्होंने कहा कि साल 2013 से रथयात्रा में इस रथ का इस्तेमाल होता रहा है और इस बार मंदिर में लगी रेलिंग तथा कमेटी से सहयोग नहीं मिलने के कारण इसे रथयात्रा में नहीं लगाया जा सका. उधर, गद्दी पर पुलिस पहुंचने से गोस्वामी समाज भी नाराज है. समाज ने जांच समिति के अधिकारों पर सवाल उठाते हुए जल्द बैठक कर आगे की रणनीति तय करने की बात कही है.
सवाल मांगते जवाब
इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि हर साल रथयात्रा में शामिल होने वाले इसे 200 किलो वजनी चांदी के रथ का असली मालिक कौन है? इसी के साथ सवाल यह भी है कि इस रथ को इस समय कहां और किसने रखा है? जांच समिति के मुताबिक इसके अलावा भी कुछ अन्य बिंदुओं पर मामले की जांच हो रही है. जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति साफ हो सकेगी.