भारत में इलेक्ट्रिक वाहन यानी EV खरीदने और चलाने के लिए आपका राज्य काफी मायने रखता है. HERESBD EV Index 2026 के मुताबिक तेलंगाना भारत का सबसे EVफ्रेंडली राज्य बन गया है. खास बात यह है कि पिछले साल तेलंगाना 25वें नंबर पर था, लेकिन इस साल उसने बड़ी छलांग लगाते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया. वहीं, पिछले साल सबसे आगे रहने वाला चंडीगढ़ इस बार पीछे हो गया है. दिल्ली की रैंकिंग में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है. दिल्ली चौथे स्थान से खिसककर 17वें नंबर पर पहुंच गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में EV चार्जिंग नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है. इस साल देश में करीब 31,500 नए पब्लिक EV चार्जर जोड़े गए हैं. इसके साथ ही चार्जरों की औसत पावर भी बढ़ी है. यह 32 kW से बढ़कर 45 kW हो गई है. इसका मतलब है कि कई जगहों पर EV को पहले की तुलना में ज्यादा तेजी से चार्ज किया जा सकता है.
चार्जरों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं
EV के लिए सिर्फ चार्जरों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है. असली चुनौती यह है कि ये चार्जर कहां लगे हैं और कितने भरोसेमंद हैं. उदाहरण के लिए, हाईवे पर किसी पेट्रोल पंप के पास लगा चार्जर ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है. वहां लाइट, टॉयलेट और खानेपीने की सुविधा भी मिल सकती है. इसके मुकाबले किसी सुनसान और अंधेरे पार्किंग एरिया में लगा चार्जर कम सुविधाजनक और कम सुरक्षित महसूस हो सकता है. मौजूदा राष्ट्रीय आंकड़ों में चार्जरों की ऐसी जानकारी अलगअलग नहीं दी जाती.
पब्लिक चार्जिंग नेटवर्क की स्थिति
HERE Technologies के सीनियर डायरेक्टर और भारत व दक्षिणपूर्व एशिया के बिजनेस हेड अभिजीत सेनगुप्ता के मुताबिक, इंडेक्स में कुल पब्लिक चार्जिंग नेटवर्क को देखा जाता है. इसमें यह अलग नहीं किया जाता कि चार्जर पेट्रोल पंप, रिटेल सेंटर या किसी अन्य जगह पर लगा है. यानी किसी राज्य में चार्जरों की संख्या ज्यादा होने से वह अपने आप EV के लिए बेहतर नहीं हो जाता. चार्जर की लोकेशन, सुरक्षा और इस्तेमाल में आसानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं.
नॉर्थईस्ट के राज्यों में बड़ी चुनौती
EV चार्जिंग नेटवर्क के मामले में नॉर्थईस्ट के कई राज्य अभी पीछे हैं. नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य देश के सबसे कमजोर EV नेटवर्क वाले क्षेत्रों में शामिल हैं. नागालैंड में सड़क की लंबाई के मुकाबले चार्जरों की संख्या काफी कम है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि नागालैंड में देश के सबसे कम चार्जर हैं. इंडेक्स में चार्जरों को सड़क नेटवर्क की लंबाई और EV की संख्या जैसे दूसरे कारकों के मुकाबले भी देखा जाता है. सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि मिजोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और मेघालय जैसे नॉर्थईस्ट के राज्यों में पब्लिक EV चार्जिंग नेटवर्क अभी देश के दूसरे हिस्सों की तुलना में कम विकसित है.