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प्रेगनेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड: कब, क्यों और इसमें डॉक्टर क्या देखते हैं?​

प्रेगनेंसी का टाइम एक महिला की लाइफ का खास और सेंसिटिव दौर होता है. इसमें बॉडी के साथसाथ इमोशन्स में भी कई बदलाव आते हैं. हार्मोनल चेंज, वजन का बढ़ना, थकान, मतली, भूख में चेंज और दूसरे कई लक्षण महसूस हो सकते हैं. इस पीरियड को तीन तिमाहियों में बांटा जाता है. हर चरण में […]

प्रेगनेंसी का टाइम एक महिला की लाइफ का खास और सेंसिटिव दौर होता है. इसमें बॉडी के साथसाथ इमोशन्स में भी कई बदलाव आते हैं. हार्मोनल चेंज, वजन का बढ़ना, थकान, मतली, भूख में चेंज और दूसरे कई लक्षण महसूस हो सकते हैं. इस पीरियड को तीन तिमाहियों में बांटा जाता है. हर चरण में बच्चे का विकास अलग तरीके से होता है. इस बीच डॉक्टर से रेगुलर चेकअप के अलावा अल्ट्रासाउंड की सलाह भी दी जाती है.

यहां हम प्रेगनेंसी के पहले अल्ट्रासाउंड की बात करने जा रहे हैं. डॉ. प्रियंका शर्मा कहती हैं कि प्रेगनेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड होने वाली मां के लिए एक खास जांच होती है. जानें एक्सपर्ट ने इसको लेकर कौनकौन सी जरूरी चीजें बताईं.

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

क्योंकि इससे डॉक्टर को शुरुआती गर्भावस्था की स्थिति को करीब से समझने में मदद मिलती है. इस दौरान डॉक्टर केवल बच्चे को ही नहीं देखते, बल्कि गर्भावस्था की पूरी शुरुआती स्थिति का आकलन करते हैं. एक्सपर्ट कहती हैं कि प्रेगनेंसी में पहला अल्ट्रासाउंड आमतौर पर शुरुआती हफ्तों में कराया जाता है. हालांकि, महिला की हेल्थ, प्रेगनेंसी की स्थिति और किसी खास लक्षण के आधार पर डॉक्टर इससे पहले भी अल्ट्रासाउंड की सलाह दे सकते हैं. शुरुआती अल्ट्रासाउंड के जरिए ये देखना होता है कि प्रेगनेंसी गर्भाशय के अंदर सही जगह पर है या नहीं. उसका विकास सही से हो रहा है या नहीं.

इस जांच से प्रेगनेंसी की अवधि का आकलन करने, हार्टबीट चेक करने और बच्चे के विकास के बारे में जानने में मदद मिल सकती है. इससे डिलीवरी की संभावित तारीख तय करने में भी मदद मिलती है. अगर ट्विन्स यानी जुड़वा बच्चे हैं, तो उनका भी शुरुआती पता चल सकता है.

इसके अलावा, अल्ट्रासाउंड के दौरान गर्भाशय या उसके आसपास किसी तरह की असामान्यता या परेशानी के संकेत भी मिल सकते हैं, जिनके आधार पर डॉक्टर आगे की जांच या उपचार की सलाह दे सकते हैं.

अगर प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों में पेट में तेज दर्द, ज्यादा ब्लीडिंग, चक्कर आना, बेहोशी जैसा महसूस होना या कोई अन्य गंभीर परेशानी हो, तो अल्ट्रासाउंड के लिए तय समय का इंतजार नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. हर महिला की प्रेगनेंसी अलग होती है. इसलिए पहला अल्ट्रासाउंड कब और किस उद्देश्य से कराना है, इसका फैसला डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना सबसे बेहतर रहता है.

अल्ट्रासाउंड कैसे किया जाता है?

शुरुआती प्रेगनेंसी में जरूरत के अनुसार पेट के ऊपर से अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है. कुछ स्थितियों में ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड की सलाह भी दी जाती है.

क्या पहली सोनोग्राफी में बच्चे की तस्वीर साफ दिखाई देती है?

जरूरी नहीं. शुरुआती हफ्तों में भ्रूण बहुत छोटा होता है, इसलिए तस्वीर बाद के अल्ट्रासाउंड की तुलना में अलग दिखाई दे सकती है. कितनी स्पष्ट तस्वीर मिलेगी, यह गर्भावस्था के सप्ताह और अल्ट्रासाउंड के तरीके पर निर्भर करता है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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