केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गोवा पुलिस को प्रेसीडेंट कलर सम्मान दिया है. यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित पुलिस सम्मानों में से एक है. यह सम्मान किसी एक पुलिसकर्मी को नहीं दिया जाता बल्कि यह पूरे पुलिस बल को मिलने वाला सामूहिक सम्मान है. इसे राष्ट्रपति का निशान भी कहा जाता है. यह सम्मान गोवा पुलिस की लंबी सेवा, अनुशासन, साहस और पेशेवर कामकाज की राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता है. 7 सितंबर 2026 को गोवा में आयोजित समारोह में यह निशान गोवा पुलिस को सौंपा गया. गोवा पुलिस के लिए यह केवल एक औपचारिक उपलब्धि नहीं है. यह उसके इतिहास, बलिदान और जनता की सेवा में किए गए काम का सम्मान है.

आइए, इसी बहाने जानते हैं कि क्या है प्रेसिडेंट्स कलर अवार्ड? कैसे और कब शुरू हुआ? क्या है इसका मतलब और अब तक किसकिस सुरक्षा बल को मिला?
प्रेसिडेंट्स कलर का अर्थ क्या है?
प्रेसिडेंट्स कलर एक विशेष ध्वज या निशान है. यह भारत के राष्ट्रपति के नाम से दिया जाता है. राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख हैं. सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर भी राष्ट्रपति ही होते हैं. पुलिस बल को यह सम्मान मिलना बताता है कि उसने लंबे समय तक ऊंचे मानकों के साथ सेवा की है. इसमें कानूनव्यवस्था बनाए रखना, नागरिकों की सुरक्षा, अपराध नियंत्रण, संकट के समय सहायता और राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान जैसे काम शामिल होते हैं. यह निशान बल के सामूहिक गौरव का प्रतीक है. इसे किसी अधिकारी की निजी उपलब्धि नहीं माना जाता. इसका सम्मान पुलिस बल के हर रैंक के कर्मचारी से जुड़ा होता है.
ध्वज सम्मान है प्रेसीडेंट कलर
नाम में कलर शब्द आने से कई लोग इसे रंगों से जुड़ा पुरस्कार समझ सकते हैं. वास्तव में सैन्य और पुलिस परंपरा में कलर का मतलब विशेष ध्वज होता है. इस ध्वज पर राष्ट्रीय प्रतीक, संबंधित पुलिस बल का चिन्ह और अन्य स्वीकृत प्रतीक हो सकते हैं. ध्वज को औपचारिक परेड, स्थापना दिवस और महत्वपूर्ण अवसरों पर सम्मान के साथ प्रदर्शित किया जाता है. इसी कारण इसे पदक से अलग समझना जरूरी है. पदक किसी व्यक्ति को मिल सकता है. लेकिन प्रेसिडेंट्स कलर पूरे बल, इकाई या संगठन को दिया जाता है.
प्रेसीडेंट कलर की शुरुआत कैसे हुई?
इस परंपरा की जड़ें पुरानी सैन्य परंपराओं में हैं. पुराने समय में सेना की पहचान उसके ध्वज से होती थी. ध्वज सैनिकों को एकजुट रखने का माध्यम था. युद्ध क्षेत्र में वह इकाई की मौजूदगी और सम्मान का प्रतीक भी होता था. ब्रिटिश शासन के दौर में सैन्य इकाइयों को किंग्स कलर दिया जाता था. यह ब्रिटिश सम्राट के प्रति निष्ठा और सैन्य उपलब्धियों का प्रतीक था. 26 जनवरी 1950 को गणराज्य बनने के बाद भारत सरकार ने किंग्स कलर की परंपरा को प्रेसीडेंट कलर के रूप में बदल दिया. इससे सम्मान का संबंध ब्रिटिश राजशाही से हटकर भारतीय गणराज्य और संविधान से जुड़ गया.
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गोवा पुलिस को प्रेसीडेंट कलर सम्मान दिया है.
यह विशेष सम्मान कब शुरू हुआ?
स्वतंत्र भारत में राष्ट्रपति के नाम से यह सम्मान 1951 में शुरू हुआ. भारतीय नौसेना इस सम्मान को पाने वाली पहली भारतीय सशस्त्र सेवा थी. देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 27 मई 1951 को भारतीय नौसेना को प्रेसिडेंट्स कलर दिया था. बाद में यह परंपरा सेना की इकाइयों, वायुसेना के दस्तों, अर्धसैनिक बलों और चुनिंदा राज्य पुलिस बलों तक पहुंची. पुलिस के संदर्भ में यह सम्मान लंबे समय तक उत्कृष्ट और अनुशासित सेवा की पहचान है. सामान्य तौर पर बल के सेवा रिकॉर्ड, प्रशिक्षण, पेशेवर मानकों और राष्ट्र व समाज के लिए योगदान को देखा जाता है.
गोवा पुलिस को यह सम्मान क्यों मिला?
गोवा पुलिस को यह सम्मान उसकी दशकों से अधिक की सेवा, पेशेवर क्षमता और सुरक्षा संबंधी काम के लिए दिया गया. गोवा एक प्रमुख पर्यटन राज्य है. यहां देश और विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं. इसलिए नागरिक सुरक्षा और पर्यटक सुरक्षा, दोनों महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं. गोवा की लंबी समुद्री तटरेखा भी सुरक्षा की दृष्टि से अहम है. तटीय सुरक्षा, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय गोवा पुलिस के कार्यक्षेत्र का हिस्सा है. समारोह में गोवा पुलिस की तकनीक आधारित पहल का भी उल्लेख हुआ.
1930 साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन के लिए एआई आधारित वॉयस सहायता प्रणाली शुरू की गई. इसका उद्देश्य साइबर ठगी की शिकायतों को तेजी से दर्ज करना और पीड़ितों तक सहायता पहुंचाना है. गोवा पुलिस ने आपातकालीन 112 सेवा की रिस्पॉन्स टाइम को भी कम किया है. पुलिस ने महिला और बाल सुरक्षा, पर्यटक सहायता, साइबर अपराध, तटीय निगरानी और मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में काम किया है.
26 जनवरी 1950 को गणराज्य बनने के बाद भारत सरकार ने किंग्स कलर की परंपरा को प्रेसीडेंट कलर के रूप में बदल दिया.
पुलिसकर्मियों के बलिदान का सम्मान
प्रेसिडेंट्स कलर किसी संस्था की उपलब्धियों के साथ उसके बलिदानों को भी याद करता है. ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों की सेवा इस सम्मान की विरासत का हिस्सा होती है. गोवा में आयोजित समारोह के दौरान ड्यूटी में प्राण गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई. इससे यह संदेश गया कि पुलिस सेवा केवल प्रशासनिक काम नहीं है. इसमें जोखिम, साहस और व्यक्तिगत बलिदान भी शामिल हैं.
गोवा पुलिस के लिए इसका क्या महत्व है?
यह सम्मान गोवा पुलिस के लिए प्रेरणा का स्रोत है. इससे पुलिस बल पर भरोसा और बढ़ सकता है. साथ ही इससे जिम्मेदारी भी बढ़ती है. ऐसा सम्मान मिलने के बाद जनता की अपेक्षाएं भी बढ़ जाती हैं. लोगों को तेज कार्रवाई, संवेदनशील व्यवहार, पारदर्शिता और बेहतर जांच की उम्मीद रहती है. इसलिए प्रेसिडेंट्स कलर को मंजिल के बजाय आगे बेहतर काम करने की प्रेरणा माना जाना चाहिए. गोवा पुलिस का मिशन शांति, सेवा, न्याय है. यह सम्मान उस दिशा में किए गए प्रयासों की पहचान के रूप में देखा जा सकता है.
अब तक किन राज्य पुलिस बलों को मिला?
राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस बलों में यह सम्मान बहुत सीमित संख्या में दिया गया है. सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचियों और रिपोर्ट के क्रम तथा कुल संख्या को लेकर कुछ अंतर दिखता है. फिर भी प्रमुख प्राप्तकर्ताओं में उत्तर प्रदेश पुलिस, दिल्ली पुलिस, महाराष्ट्र पुलिस, नागालैंड पुलिस, जम्मूकश्मीर पुलिस, त्रिपुरा पुलिस, गुजरात पुलिस, हिमाचल प्रदेश पुलिस, असम पुलिस, तमिलनाडु पुलिस, हरियाणा पुलिस, सिक्किम और छत्तीसगढ़ पुलिस इस सम्मान को पा चुके हैं. गोवा पुलिस 16 वां राज्य है, जिसे 7 सितंबर 2026 को यह सम्मान मिला. भारतीय नौसेना, सेना की कई इकाइयां, वायुसेना की इकाइयां, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड, भारतीय तट रक्षक बल, एनडीआरएफ को भी अलगअलग समय पर प्रेसिडेंट्स कलर सम्मान मिले हैं.
प्रेसिडेंट्स कलर राष्ट्रीय सम्मान, संस्थागत अनुशासन और सेवा की निरंतरता का प्रतीक है. गोवा पुलिस के लिए यह उसके अतीत का सम्मान और भविष्य की जिम्मेदारी, दोनों है. यह निशान बताता है कि पुलिस की अच्छी पहचान केवल वर्दी से नहीं बनती. वह नागरिकों के प्रति व्यवहार, संकट में त्वरित सहायता, अपराध के खिलाफ कार्रवाई और कानून के निष्पक्ष पालन से बनती है.