Aligarh News: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के खैर कस्बे में भीषण जाम एक छह साल की मासूम बच्ची की जिंदगी पर भारी पड़ गया. बुखार से पीड़ित बच्ची को उसका चाचा इलाज के लिए अस्पताल लेकर जा रहा था, लेकिन तिरंगा तिराहा से मिनी बाईपास तक लगे लंबे जाम में वाहन फंस गया. परिजनों का आरोप है कि बच्ची की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन जाम से निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला. कार फंसने के बाद चाचा ने उधार की बाइक से अस्पताल पहुंचने की कोशिश की, मगर बाइक भी जाम में फंस गई. समय पर इलाज नहीं मिल पाने के बीच बच्ची ने दम तोड़ दिया.

जानकारी के मुताबिक, बच्ची को तेज बुखार था और उसकी हालत बिगड़ने पर परिवार ने उसे तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया. बच्ची का चाचा उसे कार से लेकर घर से निकला, लेकिन खैर कस्बे में पहुंचते ही वह तिरंगा तिराहा से मिनी बाईपास तक लगे भीषण जाम में फंस गया. सड़क पर वाहनों की लंबी कतार होने के कारण कार आगे नहीं बढ़ सकी.
ट्रैफिक जाम ने ले ली बच्ची की जान
मासूम की हालत खराब होती देख चाचा ने किसी तरह एक बाइक का इंतजाम किया. उम्मीद थी कि बाइक जाम से निकलकर जल्दी अस्पताल पहुंच जाएगी, लेकिन भीड़ और वाहनों की लंबी कतार के कारण बाइक भी आगे नहीं बढ़ सकी. परिजनों का आरोप है कि बच्ची लंबे समय तक जाम में तड़पती रही और इस दौरान मौके पर यातायात को नियंत्रित करने या जाम खुलवाने के लिए कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था. बच्ची की हालत लगातार गंभीर होती गई और आखिरकार इलाज मिलने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया. मासूम की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया. बच्ची को बचा न पाने का दर्द उसके चाचा के चेहरे पर साफ दिखाई दिया और वह फूटफूटकर रो पड़े.
इस दर्दनाक घटना ने खैर कस्बे की यातायात व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि तिरंगा तिराहा से मिनी बाईपास तक अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है. इससे आम लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है. लोगों का आरोप है कि जाम की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई है.
परिजनों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी
अब स्थानीय लोगों और परिजनों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है. लोगों का कहना है कि यदि जाम पर समय रहते नियंत्रण होता और बच्ची को रास्ता मिल जाता, तो शायद उसे समय पर इलाज मिल सकता था. हालांकि बच्ची की मौत के वास्तविक कारण और पूरे घटनाक्रम की जांच संबंधित प्रशासनिक स्तर पर ही स्पष्ट होगी. इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर खैर कस्बे के इस भीषण जाम का स्थायी समाधान कब होगा, ताकि भविष्य में किसी और मरीज या जरूरतमंद को समय पर अस्पताल पहुंचने के लिए सड़कों पर जिंदगी और मौत से संघर्ष न करना पड़े.