सोमवार, 31 अगस्त 2026 ब्रेकिंग
National Nutrition Week 2026: 30 साल पहले भारतीयों की थाली में क्या होता था? आज की प्लेट से तुलना करें तो दिखेगा बड़ा बदलाव​ | अब ये 5 लोगों की बेंच करेगी सुभाष चंद्रा के 22,000 करोड़ के मामले का निपटारा, यहां है पूरी डिटेल​ | योगी का बूथ अलर्ट, स्मृति का डिजिटल वार… 2027 के लिए BJP की रणनीति तैयार​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

RBI के विदेशी मुद्रा दांव का दिखा कमाल, बैंकों के पास आया 5 लाख करोड़ रुपये का छप्परफाड़ कैश​

भारतीय बैंकिंग सिस्टम इस वक्त नकदी से लबालब है. अगस्त महीने के अंत तक बैंकों के पास सरप्लस लिक्विडिटी बढ़कर करीब 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक 30 अगस्त को ये आंकड़ा 5.05 लाख करोड़ रुपये था. ये 15 अप्रैल 2026 के बाद से लिक्विडिटी […]

भारतीय बैंकिंग सिस्टम इस वक्त नकदी से लबालब है. अगस्त महीने के अंत तक बैंकों के पास सरप्लस लिक्विडिटी बढ़कर करीब 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक 30 अगस्त को ये आंकड़ा 5.05 लाख करोड़ रुपये था. ये 15 अप्रैल 2026 के बाद से लिक्विडिटी का सबसे ऊंचा स्तर है. उस वक्त बैंकों के पास 5.22 लाख करोड़ रुपये की नकदी मौजूद थी. इस भारी भरकम कैश फ्लो के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं. पहला है विदेशी मुद्रा का जमकर आना, दूसरा है महीने के अंत में हुआ भारी सरकारी खर्च.

विदेशी फंड बनाम सरकारी खर्च

चॉइस वेल्थ के वाइस प्रेसिडेंट माताप्रसाद पांडेय के मुताबिक एफसीएनआर यानी फॉरेन करेंसी नॉनरेजिडेंट डिपॉजिट से जुड़ी एफएक्स स्वैप फैसिलिटी की डेडलाइन करीब आ रही है. इसके चलते विदेशी जमा में काफी तेजी आई है. 21 अगस्त तक बैंकों ने आरबीआई की स्पेशल स्वैप फैसिलिटी के तहत करीब 65.4 अरब डॉलर जुटाए हैं. जब ये विदेशी मुद्रा बैंकिंग सिस्टम में आई, तो आरबीआई के साथ हुए स्वैप के बदले बैंकों को भारी मात्रा में रुपये मिल गए. इसके अलावा महीने के आखिरी दिनों में सरकार ने कर्मचारियों की सैलरी से लेकर पेंशन तक का भारी भरकम भुगतान किया. इससे भी बाजार में काफी पैसा आ गया.

आरबीआई का लिक्विडिटी मैनेजमेंट

एचडीएफसी बैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि इस स्वैप फैसिलिटी के जरिए कुल 90 से 95 अरब डॉलर तक का फ्लो आ सकता है. इससे सिस्टम में 8.5 से 9 लाख करोड़ रुपये तक की नकदी बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि डॉलर की बिक्री जैसी आरबीआई की दखलंदाजी के कारण अभी भी ये अपनी पूरी क्षमता से कम है. बाजार में अतिरिक्त नकदी के इस सैलाब को कंट्रोल करने के लिए रिजर्व बैंक लगातार कदम उठा रहा है. केंद्रीय बैंक ने अतिरिक्त फंड को सोखने के लिए वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो ऑक्शन का रास्ता चुना है. अब तक ऐसे 23 ऑक्शन हो चुके हैं. इन ऑक्शन में बैंकों ने आरबीआई के पास अपना पैसा जमा किया है.

क्रेडिट ग्रोथ पर सीधा असर

आरबीआई की तमाम कोशिशों के बावजूद बैंकों के पास कैश का बड़ा भंडार मौजूद है. बैंकिंग सेक्टर के लिए ये एक बहुत अच्छी खबर है. जब बैंकों के पास पर्याप्त पैसा होता है, तो कर्ज बांटने की प्रक्रिया काफी आसान हो जाती है. मौजूदा हालात भी लेंडिंग कंडीशन को बेहतर बना रहे हैं. जानकारों का मानना है कि इस सरप्लस कैश से आने वाले दिनों में क्रेडिट ग्रोथ को बड़ा सपोर्ट मिलेगा. आसान भाषा में कहें तो ग्राहकों के लिए लोन पास होने की रफ्तार तेज हो सकती है.

आने वाले महीनों का अनुमान

आगे की स्थिति को लेकर एचडीएफसी बैंक की रिपोर्ट ने कुछ अहम अनुमान जताए हैं. सितंबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर अक्टूबर तक लिक्विडिटी 4 से 4.5 लाख करोड़ रुपये के बीच रहने की उम्मीद है. नवंबर महीने में सरकारी प्रतिभूतियों से जुड़े रिडेम्पशन के कारण कैश बैलेंस फिर से बढ़ेगा. लेकिन दिसंबर के बाद तस्वीर बदलने लगेगी. जनवरी से मार्च की तिमाही के बीच लिक्विडिटी कम होकर नेट डिमांड एंड टाइम लायबिलिटीज के 1 फीसदी से भी नीचे जा सकती है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY