नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में होने वाला BRICS 2026 शिखर सम्मेलन इस बार कूटनीतिक लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को प्रस्तावित सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की उम्मीद है।

इससे पहले आज किर्गिस्तान के बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय मुलाकात भी होने वाली है। मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग के एक साथ आने को वैश्विक राजनीति में खास संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
BRICS में क्यों अहम होगी मोदीपुतिन मुलाकात?
भारत और रूस के बीच लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया संकट, रूसयूक्रेन युद्ध और व्यापारिक तनाव जैसे मुद्दे बने हुए हैं, मोदीपुतिन वार्ता पर दुनिया की नजर रहेगी। BRICS सम्मेलन में व्यापार, विकास वित्त और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे आधिकारिक एजेंडे में प्रमुख रहेंगे।
शी जिनपिंग की भारत यात्रा भी महत्वपूर्ण
शी जिनपिंग के सितंबर में भारत आने की संभावना को भारतचीन संबंधों के लिहाज से बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। Reuters के अनुसार, अगर उनका दौरा होता है तो यह सात साल बाद भारत की उनकी पहली यात्रा होगी। हालांकि, उनकी यात्रा की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
दुनिया की नजर क्यों?
एक ही मंच पर मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की मौजूदगी ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक शक्तिसंतुलन तेजी से बदल रहा है। BRICS के विस्तार और वैश्विक व्यापार एवं वित्तीय व्यवस्था में बदलाव की चर्चाओं के बीच दिल्ली सम्मेलन भारत की कूटनीतिक भूमिका को भी सामने रखेगा।
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