एक के बाद एक कई इकोनॉमिक इंडीकेटर्स से पता चलता है कि कुल मिलाकर, भारतीय इकोनॉमी ने पश्चिम एशिया के टकराव और उससे पैदा हुए एनर्जी शॉक का सफलतापूर्वक सामना किया है. इसका सबसे बड़ा सबूत सोमवार को मिल सकता है, जब सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय अप्रैलजून तिमाही के लिए सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़े जारी करेगा. GDP किसी देश की सीमा के भीतर एक निश्चित अवधि में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य है.

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, इस तिमाही में GDP ग्रोथ 7 फीसदी हो सकती है. लेकिन विभिन्न बैंकों और एजेंसियों के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कोर ग्रोथ का आंकड़ा केंद्रीय बैंक के अनुमान से कम से कम आधा प्रतिशत अधिक हो सकता है. कुछ का तो यह भी मानना है कि ग्रोथ 8 फीसदी तक पहुंच सकती है.
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की अर्थशास्त्री कनिका पसरीचा के नेतृत्व वाली टीम ने कहा कि भूराजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में उछाल के असर वाली तिमाही में GDP ग्रोथ का मनोवैज्ञानिक 8 फीसदी के स्तर के करीब पहुंचना एक पॉजिटिव साइन है. उनका मानना है कि अप्रैलजून में GDP ग्रोथ 7.9 फीसदी होगी, जो सभी बाधाओं को पार करते हुए एक शानदार प्रदर्शन होगा.
इकोनॉमी का प्रदर्शन कुछ समय से उम्मीद से बेहतर रहा है. पिछली तीन तिमाहियों में GDP ग्रोथ रेट क्रमशः 8.3%, 8% और 7.8% रही है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया — जिसने अप्रैलजून में लगभग 8 फीसदी GDP ग्रोथ का अनुमान लगाया है ने कहा कि 50 से अधिक इंडीकेटर्स में से 86 फीसदी में इस तिमाही में तेजी देखी गई, जबकि अप्रैलजून 2025 में यह आंकड़ा 69 फीसदी था. अप्रैलजून में इस मजबूत प्रदर्शन के पीछे लोन लेने की रफ्तार का बड़ा हाथ है. आइए इसे विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं…
एक दशक में सबसे ज्यादा लोन ग्रोथ
किसी भी नए फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही, कॉर्पोरेट परफॉर्मेंस और लेंडर्स से लोन की मांग के मामले में आमतौर पर सबसे कमजोर होती है. ऐसा क्यों? क्योंकि फाइनेंशियल ईयर की पिछली व्यस्त तिमाही के बाद गतिविधियां थोड़ी धीमी हो जाती हैं और कंपनियां आने वाले साल के लिए अपनी योजनाएं बनाने में व्यस्त रहती हैं. हालांकि, वित्त वर्ष 202627 के पहले तीन महीने बैंक लोन की मांग के लिहाज से एक दशक से भी ज्यादा समय में सबसे अच्छे रहे हैं.
RBI के आंकड़ों से पता चलता है कि जून के आखिर तक बैंकों के नॉनफूड लोन में सालदरसाल 18.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. इससे पहले किसी फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के आखिर में बैंक लोन ग्रोथ इससे ज्यादा जून 2012 में थी, जब यह 18.7 फीसदी थी.
हालांकि बैंक क्रेडिट में इस तेज बढ़ोतरी की कुछ वजहें डेटा रिपोर्टिंग के तरीके में बदलाव और वेस्ट एशिया में वॉर के कारण अप्रैलजून में थोक महंगाई का बढ़ना हो सकती हैं, लेकिन पैसे की मांग बढ़ने के पीछे ठोस बुनियादी कारण भी हैं.
जून के आखिर तक, इंडस्ट्री को दिए गए बैंक लोन में सालदरसाल 19.2 फीसदी, सर्विस सेक्टर में 21.4 फीसदी और पर्सनल लोन में 15.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. जून 2025 में, इसी तरह की ग्रोथ रेट क्रमशः 6.3 फीसदी, 8.8 फीसदी और 11.7 फीसदी थी.
बदलाव का अहम मोड़
बार्कलेज के अर्थशास्त्री आस्था गुडवानी और अमृता घारे के अनुसार, कोविड19 महामारी के बाद इंडस्ट्री की तरफ से बैंक क्रेडिट की मांग, एग्रीकल्चर, सर्विस और रिटेल सेक्टर की तुलना में काफी कम रही थी, लेकिन 2025 के मध्य में हालात बदल गए. …पिछले एक साल में इंडस्ट्री की ग्रोथ में लगातार तेजी आई है, जिसकी वजह ‘बड़ी’ इंडस्ट्री को मिलने वाला बैंक क्रेडिट है: इसकी रफ्तार जून 2025 में 2% आउटस्टैंडिंग से बढ़कर जून 2026 में 16.6 फीसदी हो गई है, यानी लगभग 4 गुना बढ़ गई है.
कोटक महिंद्रा बैंक की अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज और हर्ष दोषी ने इस महीने की शुरुआत में एक रिपोर्ट में कहा कि कुल मिलाकर, हम पर्सनल लोन से हटकर इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर की ओर क्रेडिट लेने के रुझान में बदलाव देख रहे हैं, जो इकोनॉमी के ज्यादा प्रोडक्टिव सेक्टर में क्रेडिट की मजबूत मांग को दिखाता है. वेस्ट एशिया में वॉर की अनिश्चितताओं के बावजूद आर्थिक गतिविधियां और नतीजतन क्रेडिट ग्रोथ बनी हुई है.
सिर्फ भारत में ही लोन की मांग में तेजी नहीं देखी जा रही है. मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, चीन को छोड़कर एशिया में बैंक क्रेडिट में 8.5 फीसदी की ग्रोथ पिछले 18 सालों में सबसे ज्यादा है. मॉर्गन स्टेनली के अर्थशास्त्रियों ने पिछले महीने कहा कि तेजी से बढ़ता कैपेक्स , फलफूल रहा व्यापार और PPI महंगाई में बढ़ोतरी क्रेडिट की मांग में इस तेजी की वजह हैं. उनके अनुसार, एशिया 2000 के दशक के बाद से अपने सबसे मजबूत इंडस्ट्रियल साइकल” में प्रवेश कर रहा है, जिसकी वजह “AI और AI से जुड़े डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च, एनर्जी, डिफेंस और इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन में कैपेक्स में लगातार और कई सालों से हो रही बढ़ोतरी है.
कॉर्पोरेट परफॉर्मेंस
छोटी और बड़ी, सभी तरह की कंपनियां न सिर्फ लोन ले रही हैं, बल्कि अच्छे फाइनेंशियल नतीजे भी दिखा रही हैं. अप्रैलजून में, लिस्टेड प्राइवेट नॉनफाइनेंशियल कंपनियों की सेल्स में सालाना आधार पर 19.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि 202526 की आखिरी तिमाही में यह 13.9 फीसदी और अप्रैलजून 2025 में सिर्फ 5.5 फीसदी थी. इससे भी अहम बात यह है कि ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 19.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जो जनवरीमार्च में दर्ज 9.8 फीसदी और एक साल पहले की इसी अवधि में 7.3 फीसदी की बढ़ोतरी से दोगुने से भी ज्यादा है.
यह सब तब हुआ जब वेस्ट एशिया में चल रहे टकराव की वजह से इस तिमाही में कच्चे माल की लागत में 25.3 फीसदी और बिजली व फ्यूल के खर्च में 19.3 फीसदी की भारी बढ़ोतरी हुई. बैंक ऑफ बड़ौदा की इकोनॉमिस्ट अदिति गुप्ता ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा कि महंगाई के बावजूद सेल्स में जबरदस्त बढ़ोतरी यह बताती है कि ग्रोथ की रफ्तार मजबूत बनी हुई है. उन्होंने आगे कहा कि खपत और मैन्युफैक्चरिंग, दोनों ही ग्रोथ को बढ़ावा दे रहे हैं.