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Mirzapur Dog Bite Case: पानी से डर, बदल गई आवाज और कुत्ते जैसी हरकतें… फिर रेबीज से जंग जीत गया करण, डॉक्टर मान रहे मेडिकल साइंज में चमत्कार​

Mirzapur Dog Bite Case Barking: उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर में मेडिकल साइंस को भी हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। मेडिकल साइंस में रैबीज को लाईलाज बीमारी बताया जाता है। एक बार यह बीमारी होने के बाद इससे बचना नामुमकिन है। मगर मिर्ज़ापुर के रहने वाले करण ने इस बीमारी को मात दे […]

Mirzapur Dog Bite Case Barking: उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर में मेडिकल साइंस को भी हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। मेडिकल साइंस में रैबीज को लाईलाज बीमारी बताया जाता है। एक बार यह बीमारी होने के बाद इससे बचना नामुमकिन है। मगर मिर्ज़ापुर के रहने वाले करण ने इस बीमारी को मात दे कर नया जीवन हासिल किया है। 

करण को चार महीने पहले कुत्ते ने काटा था। दो महीने इलाज नहीं कराया तो करण कुत्ते के जैसी हरकतें करने लगा। दो महीने बाद इलाज कराया। अब पूरी त​हर स्वस्थ्य होकर सामान्य जीवन जी रहा है। मेडिकल साइंस में इसे चमत्कार मान रहे हैं। 

क्या कहना है पिता का 

बच्चे का इलाज बीमारी को लेकर पिता भाईलाल ने बताया कि डॉक्टर ने उसके सही होेने की उम्मीद छोड़ दी थी। बच्चा करण कुत्ते के काटने के बाद कुत्ते के जैसी हरकते करने लगा था। उसके जैसा भौंकना शुरू कर दिया। मुंह से लार टपकाता था। 

परिवार ने नहीं छोड़ी उम्मीद 

मगर परिवार ने हार उम्मीद नहीं छोड़ी। वाराणसी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरहुआ में डॉक्टरों को दिखाया। जहाँ डॉक्टर ने एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया। जिसके बाद करण की तबियत ठीक होने लगी। इसके बाद दो महीने तक इलाज चला। करण को इस बीच सात एंटी रैबीज इंजेक्शन दिए गए। दो महीने के ईलाज के बाद करण अब पूरी तरह स्वस्थ है। वह दोस्तों के साथ खेल रहा है स्कूल जा रहा है और आम जिंदगी जी रहा है।

क्या कहना है डॉक्टर 

इस बारे में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संतोष कुमार बिंद का कहना है कि मेडिकल साइंस में यह असंभव है। जो बताया जाता है कि एक बार रैबीज होने के बाद मरीज का ठीक होना मुश्किल है। डाक्टर संतोष कुमार बिंद इसे मेडिकल साइंस के लिए भी शोध का विषय बता रहे है।

क्या है पूरा मामला 

दरअलस सदर तहसील के कछवा बाजार स्थित जोगीपुरवा वार्ड के रहने वाले भाईलाल के बेटे करण को ननिहाल हरौवा में दिसंबर 2025 को कुत्ते ने काट लिया था। उस समय करण ने एंटी रैबीज का इंजेक्शन नही लगवाया था। अचानक चार महीने बाद उसकी तबियत बिगड़ी और वह कुत्ते की तरह भौंकने लगा। इलाज के लिए मिर्ज़ापुर मंडलीय अस्पताल में स्थानीय डॉक्टरों ने करण को वाराणसी बीएचयू सेंटर रेफर कर दिया।  

इस बीच रैबीज के असर के कारण लगातार करण की तबियत बिगड़ने लगी। उसे पानी से डर लगने लगा,उसकी आवाज बदल गई। वह कुत्ते की तरह आवाज निकालने लगा था। डॉक्टरों ने परिवार को सलाह दी कि इनका बचना मुश्किल है। इसे अंधेरे कमरे में बंद कर दे और परिवार के लोग दूर रहे है। 

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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