
ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय और बालार्क व नाज़ फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में उर्दू, फ़ारसी एवं अरबी विभाग के अधीन विश्वविद्यालय परिसर में ‘इंट्रोडक्शन टू विकिपीडिया’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अन्य प्रतिभागियों को विकिपीडिया तथा विकिमीडिया फाउंडेशन की विभिन्न शैक्षिक एवं ज्ञानवर्धक परियोजनाओं से परिचित कराना, उनकी उपयोगिता से अवगत कराना और विद्यार्थियों को इन परियोजनाओं में स्वैच्छिक रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करना था। कार्यशाला के दौरान विकिपीडिया और उसकी विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को न केवल सैद्धांतिक जानकारी दी, बल्कि व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से विभिन्न परियोजनाओं के उपयोग तथा उनमें शैक्षिक योगदान की प्रक्रिया से भी अवगत कराया।
कार्यशाला के पहले दिन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजय तनेजा ने विशेष अतिथियों एवं विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए कहा कि सामान्यतः बहुत से लोग केवल विकिपीडिया से परिचित हैं, लेकिन इस कार्यशाला के माध्यम से यह जानने का अवसर मिल रहा है कि विकिपीडिया, विकिमीडिया फाउंडेशन की अनेक परियोजनाओं में से एक महत्वपूर्ण परियोजना है। उन्होंने कहा कि विकिमीडिया की अन्य परियोजनाएँ भी ज्ञान, शोध और सूचनाओं के प्रसार में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
कार्यशाला में विकिपीडिया विशेषज्ञ फ़ैज़ अंजुम और आयशा परवीन ने प्रारंभिक सत्र में विकिमीडिया फाउंडेशन का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विकिमीडिया फाउंडेशन एक गैरलाभकारी वैश्विक संस्था है, जिसके अंतर्गत अनेक स्वतंत्र और परस्पर संबद्ध शैक्षिक परियोजनाएँ संचालित होती हैं। इनमें विकिपीडिया, विकिमीडिया कॉमन्स, विकिडाटा, विक्शनरी और विकिस्रोत सहित अनेक मंच शामिल हैं, जो दुनिया भर के लोगों तक निःशुल्क और सुलभ जानकारी पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।कार्यशाला के एक महत्वपूर्ण सत्र में सतदीप गिल ने ऑनलाइन भाग लेते हुए विकिस्रोत के महत्व और उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विकिस्रोत एक ऐसी परियोजना है, जहाँ प्राचीन एवं महत्वपूर्ण ग्रंथों, पुस्तकों और अन्य लिखित सामग्री को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जाता है। इससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम पाठकों को शैक्षिक एवं साहित्यिक सामग्री तक आसानी से पहुँच प्राप्त होती है। इस अवसर पर प्रतिभागियों को विकिस्रोत पर उपलब्ध सामग्री के उपयोग तथा उसमें नई सामग्री जोड़ने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के समापन सत्र में सैय्यद रज़ा हुसैन ज़ैदी ने विकिमीडिया के अंतर्गत संचालित विभिन्न परियोजनाओं का परिचय कराया। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि विकिमीडिया की विभिन्न शैक्षिक एवं शोध परियोजनाओं में काम करने के इच्छुक लोगों के लिए अनेक अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ परियोजनाओं को पूरा करने और शैक्षिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए फाउंडेशन की ओर से फेलोशिप सहित विभिन्न अवसर प्रदान किए जाते हैं, जिनसे विद्यार्थी, शोधकर्ता और स्वयंसेवक लाभ उठा सकते हैं।इस कार्यशाला के आयोजन में डॉ. मूसी रज़ा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनके प्रयासों से कार्यशाला को व्यावहारिक रूप दिया जा सका।
कार्यशाला का संचालन प्रो. सौबान सईद और डॉ. अकमल शादाब ने किया। समापन वक्तव्य एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मोहम्मद हफ़ीज़ ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए सभी विशेषज्ञों, अतिथियों, आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया तथा आशा जताई कि इस शैक्षिक गतिविधि के परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और शिक्षक विकिमीडिया की विभिन्न परियोजनाओं से जुड़कर शैक्षिक सामग्री के निर्माण, संपादन, अनुवाद और प्रसार में प्रभावी भूमिका निभाएँगे।इस कार्यशाला के लिए 100 से अधिक पंजीकरण प्राप्त हुए, जो विद्यार्थियों में इस विषय के प्रति गहरी रुचि को दर्शाते हैं। कार्यशाला में डॉ. वसी आज़म अंसारी, डॉ. मुर्तज़ा अली अतहर, डॉ. आरिफ़ अब्बास, डॉ. ज़फ़रुन नकी, डॉ. मुनव्वर हुसैन, डॉ. सिद्धार्थ सुदीप, डॉ. अख़लाक़, डॉ. अब्दुर्रहमान, डॉ. मज़ल, डॉ. मुदस्सिर और डॉ. आयशा शहनाज़ के अलावा शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।