दुबलेपतले इंसान को फैटी लिवर की प्रॉब्लम नहीं होगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है. पतले लोगों के साथ ऐसा होता है तो इसे लीन फैटी लिवर की समस्या कहा जाता है. शरीर पर फैट नहीं है लेकिन लिवर पर एक्स्ट्रा फैट जमा हो चुका है. एक्सपर्ट बताते हैं कि खराब खानपान, ज्यादा सफेद चीनी से बनी चीजें खाने की आदत और रिफाइंड कार्ब्स का डाइट में शामिल होना फैटी लिवर होने का बड़े कारण हैं. भारत में फैटी लिवर के मरीजों को कोई स्पष्ट आकंड़ा नहीं है लेकिन बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं.

रिपोर्ट्स बताती हैं कि हर 5 में से 1 इंसान फैटी लिवर का शिकार है. यहां हम पतले लोगों में फैटी लिवर से जुड़ी जरूर जानकारी आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं. एक्सपर्ट से जानें
एक्सपर्ट ने क्या कहा
डॉक्टर अरुण अय्यर फैटी लिवर को आमतौर पर बढ़े हुए वजन और मोटापे से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह पूरी तस्वीर नहीं है. ऐसे लोग जिनका वजन सामान्य है और जो देखने में पतले हैं, उनमें भी लिवर में अतिरिक्त फैट जमा हो सकता है. इसे लीन फैटी लिवर कहा जाता है. इसलिए केवल शरीर का वजन देखकर लिवर की सेहत का अंदाजा लगाना सही नहीं है.
किन लोगों में लीन फैटी लिवर का खतरा
लीन फैटी लिवर का खतरा खासतौर पर उन लोगों में देखा जा सकता है जिनकी डाइट में ज्यादा चीनी, मीठे पेय, तलाभुना या पैकेट वाला खाना शामिल है और जो शारीरिक रूप से कम एक्टिव हैं. डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, पेट के आसपास जमा फैट और शराब का सेवन भी जोखिम बढ़ा सकते हैं. कुछ लोगों में आनुवंशिक कारण भी भूमिका निभा सकते हैं.
कब पता चलती है हेल्थ प्रॉब्लम
इस स्थिति की एक बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में अक्सर कोई खास लक्षण नहीं होते. कुछ मरीजों को थकान या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्की परेशानी हो सकती है, लेकिन कई बार समस्या सामान्य जांच या अल्ट्रासाउंड के दौरान सामने आती है. लंबे समय तक फैट जमा रहने पर लिवर में सूजन और नुकसान का खतरा बढ़ सकता है.
इन बातों का रखें ध्यान
बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि पतले होने को स्वस्थ होने का प्रमाण न मानें. संतुलित आहार लें, रोज कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करें और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें. मीठे पेय, ज्यादा चीनी, फास्ट फूड और बहुत ज्यादा तलाभुना खाना कम करें. शराब का सेवन न करना या इसे पूरी तरह छोड़ना लिवर के लिए बेहतर है.
इसके अलावा, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स की समयसमय पर जांच करवाना भी जरूरी है. अगर किसी व्यक्ति में जोखिम कारक मौजूद हैं, तो डॉक्टर की सलाह से लिवर की जांच करानी चाहिए. समय पर पहचान और जीवनशैली में सही बदलाव Lean Fatty Liver को बढ़ने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.