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EV सेक्टर में Olectra का बड़ा प्लान, हर साल बनाएगी 10 हजार इलेक्ट्रिक बसें और ट्रक​

भारत में इलेक्ट्रिक बसों और कमर्शियल वाहनों की मांग तेजी से बढ़ने की उम्मीद है. इसे देखते हुए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कंपनी ऑलेक्ट्रा ग्रीनटेक अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी कर रही है. कंपनी अगले 2 से 3 साल में हर साल 10,000 इलेक्ट्रिक बस और ट्रक बनाने की क्षमता तैयार करना […]

भारत में इलेक्ट्रिक बसों और कमर्शियल वाहनों की मांग तेजी से बढ़ने की उम्मीद है. इसे देखते हुए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कंपनी ऑलेक्ट्रा ग्रीनटेक अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी कर रही है. कंपनी अगले 2 से 3 साल में हर साल 10,000 इलेक्ट्रिक बस और ट्रक बनाने की क्षमता तैयार करना चाहती है.

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश बाबू के मुताबिक, अगले तीन साल में भारत का इलेक्ट्रिक बस बाजार करीब 20,000 यूनिट सालाना तक पहुंच सकता है. कंपनी अपनी 10,000 यूनिट की क्षमता के जरिए इस बाजार का करीब 4050% हिस्सा संभालने की तैयारी कर रही है.

₹600 करोड़ का निवेश

कंपनी नए इलेक्ट्रिक बस और ट्रक प्लेटफॉर्म के विकास पर करीब ₹450 करोड़ खर्च करेगी. इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी सुविधाओं के लिए करीब ₹150 करोड़ का निवेश किया जाएगा. यानी अगले कुछ सालों में कुल निवेश करीब ₹600 करोड़ होगा. ऑलेक्ट्रा 9 मीटर और 12 मीटर की नई इलेक्ट्रिक बसें तैयार कर रही है. इनमें 12 मीटर की लोफ्लोर सिटी बस भी शामिल होगी. इसके अलावा लंबी दूरी के सफर के लिए 13.5 मीटर की इलेक्ट्रिक कोच और इलेक्ट्रिक ट्रक प्लेटफॉर्म पर भी काम चल रहा है.

भारत में बनेगी ज्यादा EV टेक्नोलॉजी

कंपनी का फोकस अब ज्यादा से ज्यादा सामान भारत में ही तैयार करने पर है. नए प्लेटफॉर्म को भारत में डिजाइन, डेवलप और तैयार किया जा रहा है. इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और सप्लाई चेन भी छोटी होगी. कंपनी का कहना है कि दिसंबर तक बैटरी सेल को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख चीजें स्थानीय स्तर पर हासिल करने की योजना है. बैटरी पैक के लिए भी स्थानीय सप्लायर्स से खरीद शुरू हो चुकी है.

निजी ऑपरेटरों के लिए फाइनेंस बड़ी चुनौती

ऑलेक्ट्रा अब तक 4,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों की डिलीवरी कर चुकी है. हालांकि, निजी बस ऑपरेटरों के लिए फाइनेंस अभी भी बड़ी समस्या है. इलेक्ट्रिक बसों के लिए आमतौर पर 57 साल की फाइनेंस अवधि चाहिए, जबकि डीजल बसों के लिए यह करीब 34 साल होती है. कंपनी को उम्मीद है कि लंबी अवधि वाले नए फाइनेंस विकल्पों से निजी क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों की मांग बढ़ेगी. ऑलेक्ट्रा अगले दो साल भारत पर फोकस रखेगी और FY28 से बसों का निर्यात शुरू करने की भी तैयारी कर रही है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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