टाटा ग्रुप में चल रही अंदर की तकरार अब सरकार के दरवाजे तक पहुंच गई हैं. कुछ दिन पहले एन चंद्रशेखरन और नोएल टाटा दोनों को केंद्र सरकार ने अपने पास बुलाकर मुलाकात भी की है. ईटी की रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि टाटा के टॉप अधिकारियों एन. चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने सरकार के सीनियर अधिकारियों को ग्रुप के अंदर चल रही उथलपुथल के बारे में जानकारी दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे फरवरी में टाटा संस के चेयरमैन का पद छोड़ देंगे. ये तमाम बातें पिछले बुधवार को एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे से पहले हुई थी.

सूत्रों के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों के साथ हुई बातचीत में चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच रणनीति और गवर्नेंस को लेकर मतभेद, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर बनी अनिश्चितता और नए बिजनेस वेंचर्स की दिशा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. सरकारी नेताओं ने दोनों टाटा अधिकारियों के साथ अलगअलग बैठकें कीं. लेकिन अभी तक इन मुलाकातों की सही तारीखों और उनमें हुई बातचीत की जानकारी की पुष्टि नहीं हो सकी है. इन मुलाकातों में कुछ नियुक्तियों, टाटा ग्रुप की एयरलाइन एयर इंडिया और टाटा के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथसाथ सेमीकंडक्टर वेंचर्स में हुए नुकसान से जुड़ी चिंताएं भी शामिल थीं.
नोएल टाटा का दिल्ली दौरा
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, नोएल टाटा वीकेंड पर राजधानी के दौरे पर थे. यह दौरा स्वतंत्रता दिवस समारोह और पारसी न्यू ईयर की छुट्टियों के दौरान हुआ, लेकिन सूत्रों ने वीकेंड की इस यात्रा के दौरान सरकारी अधिकारियों के साथ किसी भी बैठक से इनकार किया. उनके करीबी लोगों ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि टाटा अधिकारी की यह वीकेंड यात्रा ग्रुप की रिटेल कंपनी ‘ट्रेंट’ से जुड़ी थी और इसका ग्रुप में उत्तराधिकार से जुड़े घटनाक्रमों से कोई लेनादेना नहीं था. नोएल टाटा ‘ट्रेंट’ के नॉनएग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं. ग्रुप की 70 साल की रिटायरमेंट उम्र सीमा के तहत वे इस नवंबर में यह पद छोड़ देंगे. चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच उनकी इस यात्रा के समय ने लोगों का ध्यान खींचा, खासकर इसलिए क्योंकि ‘ट्रेंट’ के रोजमर्रा के कामकाज में उनकी कोई भूमिका नहीं है.
क्या सरकार ने टाटा के लीडर्स को बुलाया था?
मीडिया रिपोर्ट में साफ किया गया है कि किसी प्राइवेट सेक्टर के कॉर्पोरेट ग्रुप के अंदरूनी मामलों की जानकारी देश के राजनीतिक नेतृत्व को देना आम बात नहीं है, खासकर तब जब वह ग्रुप किसी फाइनेंशियल संकट या दिवालियापन के प्रोसेस से न गुजर रहा हो, हालाँकि, सरकारें सिस्टम के लिए अहम व्यवसायों पर नजर रखती हैं. इस मामले में, सरकारी अधिकारियों ने टाटा ग्रुप के नेताओं की बात सुनी और यह पक्का किया कि वे किसी भी गुट का पक्ष न लें. साथ ही, अधिकारियों से संपर्क करने वाले लोग चंद्रशेखरन और नोएल ही थे.
टाटा ग्रुप के अंदर हो रही गतिविधियों में सरकार की दिलचस्पी कोई नई बात नहीं है. इससे पहले 2025 में, नोएल टाटा के अपने सौतेले भाई रतन टाटा की जगह टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बनने के लगभग एक साल बाद, टाटा संस को कंट्रोल करने वाले ट्रस्ट्स के बीच मतभेद पैदा हो गए. इसके चलते नोएल टाटा, चंद्रशेखरन और टीवीएस मोटर के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन समेत अन्य ट्रस्टियों ने सीनियर सरकारी अधिकारियों के साथ अलगअलग बातचीत की. इन बैठकों का मकसद ट्रस्ट्स के भीतर के मतभेदों को सुलझाना और टाटा संस के कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर से जुड़े प्रस्तावित नियमों पर चर्चा करना था.
टाटा लीडरशिप और सरकारी अधिकारियों के बीच हालिया बैठकें जून 2026 में नोएल टाटा की भारतीय रिजर्व बैंक के सीनियर अधिकारियों के साथ हुई मुलाकात के लगभग दो महीने बाद हुईं. यह मुलाकात टाटा संस के संभावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग के बारे में थी, जिससे कंपनी पर ट्रस्ट्स का कंट्रोल कम हो जाता.
क्या आईपीओ ही है इस समस्या का हल?
टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार एक ट्रस्टी ने कहा कि टाटा संस के चेयरमैन और ट्रस्ट्स के चेयरमैन के बीच बारबार होने वाले तनाव—चाहे वह साइरस मिस्त्री के समय में हो या अब चंद्रशेखरन के समय में—ग्रुप में एक ऐसी स्ट्रक्चरल समस्या की ओर इशारा करते हैं जिसके लिए लंबे समय तक चलने वाले समाधान की जरूरत है. ट्रस्टी ने रिपोर्ट में कहा कि आपको कोई रास्ता निकालना होगा. उन्होंने कहा कि IPO एक ऐसा ही समाधान है, जो कंपनी और उसके कोर शेयरहोल्डर के बीच के रिश्ते को नए सिरे से तय करेगा. एन चंद्रशेखरन, जिन्हें ‘चंद्रा’ के नाम से भी जाना जाता है, 12 अगस्त को एक और हाईप्रोफाइल एग्जिट बन गए. उन्होंने कहा कि 20 फरवरी, 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल खत्म होने पर वे टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे. उनके इस ऐलान से पहले रतन टाटा के भरोसेमंद एग्जीक्यूटिव विजय सिंह और मेहली मिस्त्री धीरेधीरे हट चुके थे.