Uttarakhand News: रूस में फंसे उत्तराखंड के दो भाइयों की 97 दिन बाद वतन वापसी हुई है। पिथौरागढ़ निवासी आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की को रोजगार का झांसा देकर ट्रेवल एजेंसी के जरिए रूस भेज दिया गया था। इतना ही नहीं उनसे 8 लाख रुपए भी एठ लिए गए। इसके बाद उनसे मर्जी के खिलाफ काम कराया जाने लगा। पर उत्तराखंड सरकार के प्रयासों से दोनों भाई सकुशल अपने घर लौट आए हैं।

रोजगार का झांसा देकर ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से भेजा रूस, CM पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से रूस में 97 दिनों से फंसे उत्तराखंड के दो भाइयों की सुरक्षित भारत वापसी हुई…#PushkarSinghDhami #Uttarakhand #Pithoragarh #Russia #UttarakhandNews #SafeReturn #IndianEmbassy… pic.twitter.com/ljgtRBiEcH
— Bansal News Official August 12, 2026
सीएम के प्रयास से लौटे दोनों भाई
आपको बता दें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हस्तक्षेप और राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों से रूस में करीब 97 दिनों से फंसे पिथौरागढ़ निवासी दो भाइयों आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। दोनों भाइयों की सकुशल वापसी के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनसे फोन पर बात कर उनका हालचाल जाना।
मुख्यमंत्री ने दोनों युवकों और उनके परिजनों से बातचीत करते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी भी ली। इस दौरान लंबे समय बाद दोनों बेटों के सुरक्षित घर लौटने पर परिवार ने राहत व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री के संवेदनशील हस्तक्षेप एवं त्वरित प्रयासों के लिए आभार जताया।
ट्रैवल एजेंसी के जरिए भेजा था रूस
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों भाइयों को सितारगंज स्थित एक ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से विदेश में बेहतर रोजगार दिलाने का भरोसा दिया गया था। परिवार का आरोप है कि रोजगार के नाम पर उनसे करीब 8 लाख रुपए लिए गए, जिसके बाद दोनों भाइयों को रूस भेज दिया गया।
5 मई को हुए थे रवाना
आपको बता दें दोनों भाई 5 मई 2026 को भारत से रवाना हुए और 6 मई को मॉस्को पहुंचे। परिजनों के अनुसार, रूस पहुंचने के बाद उन्हें वो काम ही नहीं दिया गया जिसके लिए उन्हें विदेश भेजा गया था। बल्कि उनकी मर्जी के खिलाफ उनसे दूसरे काम कराए जा रहे थे। जिसकी सैलरी भी उन्हें नहीं दी जा रही थी।
परिवार का कहना है कि दोनों युवकों को स्वतंत्र रूप से आनेजाने की अनुमति भी नहीं थी। दिए गए काम को मना करने पर उन्हें धमकाया भी जाता था।
संपर्क नहीं होने पर बढ़ गई थी चिंता
आपको बता दें लंबे समय तक नियमित संपर्क नहीं हो पाने के कारण परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती गई। अंतिम संपर्क के दौरान युवकों ने जानकारी दी थी कि जिस परिसर में उन्हें रखा गया था, उसके आसपास ड्रोन अथवा मिसाइल हमले हो रहे हैं। जिसके बाद उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता और गहरा गई।
मामला संज्ञान में आते ही सीएम पुष्कर सिंह धामी ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को दोनों युवकों की सुरक्षित और शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उनके निर्देश पर राज्य सरकार के अधिकारियों ने विदेश मंत्रालय एवं रूस स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क और समन्वय स्थापित कर दोनों भाइयों की सुरक्षित वापसी के प्रयास किए गए।
निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप दोनों भाइयों की सुरक्षित भारत वापसी के लिए करीब 97 दिनों के लंबे इंतजार के बाद वे सकुशल अपने घर पहुंच सके।
क्या कहना है सीएम का
इस प्रयास पर सीएम ने कहा कि उत्तराखण्ड का कोई भी नागरिक दुनिया के किसी भी हिस्से में संकट में हो, राज्य सरकार उसकी सहायता के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। प्रदेशवासियों की सुरक्षा, सम्मान और हितों की रक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में राज्य सरकार केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय एवं संबंधित भारतीय मिशनों के साथ समन्वय स्थापित कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करती है।
दोनों युवकों की सुरक्षित वापसी के प्रयासों में यूकेडी के वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी एवं समाजसेवी रामदेव वर्मा ने भी परिवार के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा और सरकार एवं संबंधित अधिकारियों के स्तर पर समन्वय में सहयोग किया। आपको बता दें दोनों भाइयों की सकुशल घर वापसी पर परिजनों ने सीएम पुष्कर सिंह धामी, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास, राज्य सरकार के अधिकारियों एवं इस प्रयास में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।