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पैरा एशियाड ट्रायल में नंबर-1, फिर भी टीम से बाहर​

नई दिल्ली: आगामी एशियन पैरा गेम्स से पहले भारतीय पैरा शूटिंग में चयन को लेकर विवाद सामने आया है। पैरा राइफल शूटर सिमरन शर्मा ने टीम चयन की नीति को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। सिमरन का आरोप है कि घरेलू चयन नीति में निर्धारित न्यूनतम योग्यता मानक यानी Minimum Qualification Score को […]

नई दिल्ली: आगामी एशियन पैरा गेम्स से पहले भारतीय पैरा शूटिंग में चयन को लेकर विवाद सामने आया है। पैरा राइफल शूटर सिमरन शर्मा ने टीम चयन की नीति को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। सिमरन का आरोप है कि घरेलू चयन नीति में निर्धारित न्यूनतम योग्यता मानक यानी Minimum Qualification Score को इतना ऊंचा रखा गया कि बेहतर प्रदर्शन के बावजूद उनके चयन का रास्ता बंद हो गया।

सिमरन शर्मा SH2 राइफल कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करती हैं। इस कैटेगरी में ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं जिन्हें राइफल का वजन स्वतंत्र रूप से संभालने में कठिनाई होती है और वे स्प्रिंगसपोर्टेड शूटिंग स्टैंड का इस्तेमाल करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सिमरन को पहले SH1 कैटेगरी में वर्गीकृत किया गया था, लेकिन 2024 में उनकी क्लासिफिकेशन को बदलकर SH2 किया गया।

ट्रायल में शानदार प्रदर्शन का दावा

सिमरन की याचिका के अनुसार, वह वर्तमान में R4 और R5 में भारत की नंबर1 तथा R9 में नंबर2 खिलाड़ी हैं। मई 2026 में महू में आयोजित चयन ट्रायल के दौरान उन्होंने गेम्स के आधिकारिक MQS मानकों को भी पार किया। इसके बावजूद घरेलू चयन नीति में निर्धारित अधिक कड़े मानकों के कारण उन्हें टीम में जगह नहीं मिल सकी।

याचिका में सिमरन ने दावा किया है कि घरेलू चयन नीति में कुछ स्पर्धाओं के लिए निर्धारित स्कोर एशियन पैरा गेम्स के आधिकारिक MQS से काफी अधिक थे। उदाहरण के तौर पर R4 के लिए घरेलू मानक 630.2 रखा गया था, जबकि गेम्स का MQS 615.0 था। इसी तरह R5 के लिए घरेलू मानक 635.4 और आधिकारिक MQS 625.0 बताया गया है। R9 में भी घरेलू मानक 620.2 था, जबकि गेम्स का MQS 600.0 था।

चयन नीति पर उठे सवाल

सिमरन की याचिका में सवाल उठाया गया है कि जब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए आधिकारिक MQS कम है, तो घरेलू चयन नीति में उससे कहीं ज्यादा कठिन मानक क्यों लागू किए गए। उनका कहना है कि ऐसे मानकों के कारण खिलाड़ियों के प्रदर्शन और वास्तविक अंतरराष्ट्रीय पात्रता के बीच अंतर पैदा हो रहा है।

सिमरन ने अदालत से आग्रह किया है कि एशियन पैरा गेम्स में उनकी भागीदारी पर केवल इन घरेलू MQS मानकों को यांत्रिक तरीके से लागू करके रोक न लगाई जाए। उनका उद्देश्य चयन प्रक्रिया की समीक्षा करवाना और अपने प्रदर्शन के आधार पर टीम में जगह पाने का अवसर हासिल करना है।

पैरा स्पोर्ट्स में चयन प्रक्रिया पर बढ़ी बहस

सिमरन का मामला अकेला नहीं है। एशियन पैरा गेम्स की तैयारियों के बीच पैरा साइक्लिंग में भी खिलाड़ियों ने चयन प्रक्रिया और पात्रता मानकों को लेकर सवाल उठाए हैं। खिलाड़ियों ने प्रकाशित मानदंडों के कथित असंगत इस्तेमाल, प्रशासनिक कमियों, नियमों में बदलाव और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी जैसी चिंताएं उठाई हैं।

अब सिमरन शर्मा की याचिका ने पैरा स्पोर्ट्स में चयन नीति, MQS मानकों और खिलाड़ियों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस खड़ी कर दी है। आने वाले समय में अदालत का रुख इस मामले के साथसाथ भविष्य की चयन प्रक्रियाओं के लिए भी अहम हो सकता है।

 

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संपादकीय टीम

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