इसे भारत की समझदारी कहें या स्ट्रैटजी, लेकिन इस वक्त जो हालात बन रहे हैं, उसमें यह स्ट्ैटजी खूब काम आ रही है. पहले मीडिल ईस्ट के देशों से भारत तेल खरीद रहा था, फिर रूस ने ऑफर दिया तो भारत उधर चला गया. ईरान जंग शुरू हुई तब तक भारत जमकर तेल रूस से खरीद रहा था. लेकिन इसी बीच अमेरिका की टेंशन आ गई, भारत को क्रूड ऑयल खरीद डायवर्सिफाई करना पड़ा.

भारत ने तय कर लिया कि किसी एक देश के भरोसे नहीं रहना है. नतीजा फिर मिडिल ईस्ट के देशों से तेल सप्लाई बढ़ा दी. लेकिन जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे जहाजों पर हमले होने लगे तो भारत ने एक बार फिर जहाज रूस की ओर मोड़ दिया है. और पुराने दोस्त रूस ने भी निराश नहीं किया.
आंकड़े बता रहे कि दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश भारत ने अपनी तेल आपूर्ति की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. अप्रैल से जून की तिमाही के दौरान भारत ने रूस और लैटिन अमेरिकी देशों से कच्चे तेल के आयात में भारी बढ़ोतरी की है. वहीं दूसरी ओर, इस अवधि में मिडिल ईस्ट से होने वाले तेल आयात में काफी गिरावट दर्ज की गई है.
क्यों बदलनी पड़ी रणनीति
भारत ने कुछ समय पहले अमेरिका के साथ तनाव के बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में कटौती की थी. लेकिन खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण भारत को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी. अमेरिका ने जैसे ही रूस से तेल खरीदने पर दी गई अस्थायी छूट आगे बढ़ाई, भारत ने इसका फायदा उठाते हुए रूस से तेल सप्लाई फिर बढ़ा दी है, ताकि मध्य पूर्व के रास्ते होने वाले नुकसान और तेल की कमी की भरपाई की जा सके.
22.6 लाख बैरल प्रति दिन की खरीद
मौजूदा चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से लेकर जून के बीच के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि मिडिल ईस्ट से भारत का तेल इंपोर्ट लगभग 27 प्रतिशत तक गिर गया है. अब यह घटकर करीब 15.5 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है. इसके उलट इसी वक्त में कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स से तेल आयात 8.3 प्रतिशत बढ़ गया है. इन देशों में रूस सबसे बड़ा हिस्सेदार है. भारत अब इन देशों से रोजाना 22.6 लाख बैरल प्रति दिन तेल खरीद रहा है.
कितना तेल खरीद रहा भारत
अकेले जून जून की बात करें तो भारत में रूसी तेल से अब तक का सबसे ज्यादा तेल इंपोर्ट किया है. भारत रूस से रोजाना रिकॉर्ड 2.64 मिलियन बैरल तेल खरीद रहा है. यह आंकड़ा मई महीने की तुलना में लगभग 37.4 प्रतिशत अधिक है. आंकड़ों से यह भी साफ पता चलता है कि भारत के कुल 5.24 मिलियन बैरल प्रति दिन के भारीभरकम तेल आयात में अकेले रूस की हिस्सेदारी आधी हो गई है. यह बताता है कि वर्तमान में भारत की ऊर्जा जरूरतें रूसी तेल पर काफी हद तक निर्भर हो चुकी हैं.
अब हो गई 41 फीसदी हिस्सेदारी
भारत के कुल क्रूड ऑयल के इंपोर्ट मिक्स में अब रूस का दबदबा और भी ज्यादा बढ़ गया है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून की अवधि में भारत के कुल तेल इंपोर्ट में रूसी तेल की हिस्सेदारी पिछले साल के लगभग 38 प्रतिशत से बढ़कर अब करीब 41 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इसके ठीक उलट मिडिल ईस्ट के देशों से आने वाले तेल की हिस्सेदारी में भारी गिरावट आई है. यह पिछले साल के 41.4 प्रतिशत के मुकाबले अब काफी कम होकर केवल 31 प्रतिशत पर ही सिमट गई है.
तब और बढ़ेगी हिस्सेदारी
भारतीय रिफाइनरियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई ऐसे ही बाधित रहती है और यमन के ईरानसमर्थित हूती विद्रोही सऊदी अरब पर समुद्री नाकाबंदी लगाते हैं तो रूस, पश्चिम अफ्रीका और अमेरिका पर भारत की निर्भरता और अधिक बढ़ जाएगी. दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता होने के नाते भारत ने जून के महीने में सऊदी अरब से 403,000 बैरल प्रति दिन तेल का आयात किया था, जिसकी सप्लाई मुख्य रूप से वहां के सुरक्षित माने जाने वाले यानबू बंदरगाह के माध्यम से भारत तक की गई थी.