अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टेंशन की वजह से शेयर बाजार में सोमवार को करीब एक फीसदी की गिरावट देखने को मिल रही है. ईरान ने दावा किया है कि उसने एक बार फिर से होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है. जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में 5 फीसदी की तेजी देखने को मिली है और खाड़ी देशों का कच्चा तेल 80 डॉलर पर पहुंच गया है. वहीं दूसरी ओर रुपए में भी गिरावट देखने को मिली है. साथ ही एशियाई बाजारों में भी बड़ी गिरावट देखी जा रही है.

शुरुआती सत्र में सेंसेक्स में 700 से ज्यादा अंकों की गिरावट देखने को मिली है. जबकि निफ्टी में 210 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल रही है. यही कारण है कि शेयर बाजार खुलते ही निवेशकों को करीब 3 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है. टीसीएस, एचसीएल, एनटीपीसी और पॉवरग्रिड जैसी कंपनियों को छोड़ दिया जाए तो तमाम शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं.
शेयर बाजार में गिरावट
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. आंकड़ों को देखें तो कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स 711.96 अंकों गिरावट के साथ 76,857.43 अंकों के लोअर लेवल पर आ गया. जबकि सेंसेक्स 76,963.35 अंकों के साथ ओपन हुआ था और शुक्रवार को 77,569.39 अंकों के साथ बंद हुआ था. वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी करीब 210 अंकों की गिरावट के साथ 24,000.20 अंकों पर दिखाई दिया. जबकि मौजूदा समय यानी 9 बजकर 40 मिनट पर 140 अंकों की गिरावट के साथ 24,044.60 अंकों पर कारोबार करता हुआ दिखाई दिया.
इन कारणों से आई शेयर बाजार में गिरावट
शेयर बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण है कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें. ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4 फीसदी से ज़्यादा बढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल हो गए, जिससे भारत में महंगाई की चिंता फिर से बढ़ गई है. तेल की ज़्यादा कीमतें भारत के लिए बुरी खबर हैं, क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयात करने वाला देश है. इससे महंगाई का खतरा बढ़ता है और आर्थिक विकास व कंपनियों की कमाई पर दबाव पड़ता है. इासके अलावा अमेरिका और ईरान की सेनाओं के बीच जबरदस्त मिसाइल और ड्रोन हमले हुए. रविवार को तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया और कहा कि उसने अहम ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ को फिर से बंद कर दिया है. डर या अस्थिरता को मापने वाला इंडेक्स लगभग 10 प्रतिशत बढ़कर 13.38 के स्तर पर पहुंच गया, जो ज्यादा अनिश्चितता का संकेत है. वहीं दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले में रुपए में 37 पैसे की गिरावट देखने को मिल रही है. साथ ही एशियाई बाजारों में गिरावट का असर भी देखने को मिल रहा है.
निवेशकों को करीब 3 लाख करोड़ का नुकसान
शेयर बाजार में गिरावट की वजह से निवेशकों को भी मोटा नुकसान हुआ है. निवेशकों का नुकसान बीएसई के मार्केट कैप से जुड़ा हुआ है. अगर बात शेयर बाजार का मार्केट कैप उठता है तो इसका मतलब है कि निवेशकों को फायदा हुआ है. मार्केट कैप कम होने का संकेत है निवेशकों को नुकसान. इसे आंकड़ों की जुबानी समझने की कोशिश करते हैं. शुक्रवार को बीएसई का मार्केट कैप करीब 482 लाख करोड़ रुपए पर था, जो सोमवार को कारोबारी सत्र के दौरान करीब 479 लाख करोड़ रुपए पर आ गया. इसका मतलब है कि बीएसई के मार्केट कैप करीब 3 लाख करोड़ रुपए कम हो गया. जोकि शेयर बाजार निवेशकों का बड़ा नुकसान है.