चीन को अपने टेक्नोलॉजी पर घमंड होता है लेकिन पूरी दुनिया में उसके सामान का खूब मजाक उड़ता है. अब चीन जो दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बनाकर अपनी इंजीनियरिंग ताकत दिखाना चाहता था उसकी भी भद्द पीटने वाली है. दरअसल तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर बनने वाला यह मेगा डैम सिर्फ बिजली उत्पादन का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि बीजिंग की रणनीतिक ताकत का भी प्रतीक माना जा रहा था. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि इस महत्वाकांक्षी योजना की सबसे बड़ी चुनौती भारत या दुनिया के दूसरे देशों ने नहीं, बल्कि चीन के अपने वैज्ञानिकों ने खड़ी कर दी है. जिस जगह पर करीब 147 अरब डॉलर की लागत वाला यह प्रोजेक्ट बन रहा है, वहीं सक्रिय भूगर्भीय फॉल्ट मौजूद है. अगर वैज्ञानिकों की चेतावनी सही साबित होती है तो यह दुनिया के सबसे महंगे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. यही वजह है कि अब इस डैम की सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.

दिलचस्प बात यह है कि भारत कई सालों से इसी मुद्दे को उठाता रहा है. नई दिल्ली लगातार कहती रही कि ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपरी हिस्से में स्थित यह इलाका भूकंप, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़े खतरों के लिहाज से बेहद संवेदनशील है. चीन हर बार इन आशंकाओं को खारिज करता रहा और दावा करता रहा कि उसका प्रोजेक्ट पूरी तरह सुरक्षित है. लेकिन अब चीन जियोलॉजिकल सर्वे से जुड़े वैज्ञानिकों की स्टडी ने पहली बार उन आशंकाओं को वैज्ञानिक आधार दे दिया है, जिन पर अब तक बीजिंग सवाल उठाता रहा था.