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सबसे पहले आपको बता दें कि एचआईवी मूल रूप से एक प्रकार का वायरस है जो संक्रमण के लिए जिम्मेदार होता है। इसका मतलब है ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी वायरस (Human immunodeficiency virus)। एचआईवी से संक्रमित होने के बाद एड्स अंतिम चरण होता है। यह 8 से 10 साल के संक्रमण के बाद पता लगाया जा सकता है। एड्स को अक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशियेंसी सिंड्रोम (acquired immune deficiency syndrome) कहते है।
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इसका मतलब एचआईवी संक्रमण का सीधा मतलब एड्स से है क्योंकि इसी वायरस की पहचान से एड्स की पहचान संभव है और समय रहते अगर एचआईवी की पहचान कर ली गई, तो एड्स से भी बचा जा सकता है।
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एड्स को लेकर लोगों को सबसे बड़ी गलतफहमी ये है कि एचआईवी संक्रमण हाथ मिलाने, गले मिलने से फैलता है। लोगों का ये भी मानना है कि यह इंसान के लार और यूरिन के जरिए भी फैलता है। लेकिन आपको बता दें कि छूने, पसीने, थूक और पेशाब से एचआईवी नहीं फैलता है।
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अफ्रीका, भारत और थाईलैंड में कुछ जगहों पर ये कहा जाता है कि कुंवारी लड़कियों के साथ संबंध बनाने से एड्स ठीक हो जाता है। लेकिन ये बात बिल्कुल गलत है। किसी कुंवारे व्यक्ति या महिला के साथ यौन संबंध रखने से एचआईवी ठीक नहीं होता है।
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कुछ लोगों का ये भी कहना है कि मच्छर या आपके शरीर से खून चूसने वाले कीड़ों के काटने से एचआईवी फैलता है। जबकि ऐसा नहीं है। खून चूसने वाले कीड़े या मच्छर काटते हैं तो वो पहले जिसे काटते हैं उसका खून दूसरे के शरीर में इन्जेक्ट नहीं करते, इससे ये वायरस फैल नहीं सकता।
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एचआईवी को लेकर भ्रम ये है कि अगर कोई मां संक्रमित होती है, तो उसके बच्चे को भी एड्स हो जाता है। लेकिन ऐसा हो ये जरूरी नहीं है। अगर प्रेग्नेंट एचआईवी पीड़ित महिला का इलाज ठीक तरीके से चलता है वो बिना संक्रमण के खतरे के बच्चे को जन्म दे सकती हैं।
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आपको बता दें कि एचआईवी कभी भी एक जगह एक साथ सांस लेने से नहीं फैलता, ना ही गले मिलने, किस करने और हाथ मिलाने से यह नहीं फैलता है। एक ही बर्तन में खाने, एक ही नल से नहाने, एक दूसरे के साथ पर्सनल चीजें शेयर करने से एचआईवी नहीं फैलता है।











