Why odd Number Knots Tied in Kalawa: सनातन धर्म में कलावा, जिसे मौली केवल भी कहते हैं, एक सामान्य धागा नहीं बल्कि आस्था और शुभता का प्रतीक है। पूजा-पाठ, यज्ञ, व्रत जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान इसे कलाई पर बांधने की परंपरा पुरातन समय से चली आ रही है। कई लोग बुरी नजर से बचने के लिए भी काला धागा पहनते हैं। अक्सर कलावा बांधते समय उसमें 3, 5 या 7 गांठें लगाई जाती है। विषम संख्या में गांठें बांधने के पीछे की क्या मान्यताएं बताई जाती हैं।
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काला कलावा क्यों पहनते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काला रंग नकारात्मक शक्तियों और बुरी नजर के प्रभाव को कम करता है। यही कारण है कि छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्गों तक को काला धागा या कलावा पहनाया जाता है। कहते हैं कि यह व्यक्ति के लिए सुरक्षा का एक आध्यात्मिक कवच बनाने में सहायक है और नकारात्मक प्रभावों से बचाव करता है।
3 गांठों का महत्व
काले कलावे में 3 गांठें लगाने की परंपरा सबसे अधिक प्रचलित है। धार्मिक दृष्टि से ये तीन गांठें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक हैं। मान्यता है कि सृष्टि के इन तीन प्रमुख देवों का आशीर्वाद व्यक्ति के जीवन में संतुलन और सुख-शांति बनाए रखने में सहायक होता है। वहीं, कुछ परंपराओं में इन्हें मन, वचन और कर्म की पवित्रता से भी जोड़ा जाता है।
5 गांठें क्या दर्शाती हैं?
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, पांच गांठें पंचतत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं। इनमें पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश शामिल हैं। मानव शरीर भी इन्हीं पांच तत्वों से निर्मित है। ऐसे में 5 गांठों वाला कलावा जीवन में संतुलन, सकारात्मकता और ऊर्जा का प्रतीक होता है। ग्रह दोष शांति के लिए भी इसे धारण करने की सलाह दी जाती है।
7 गांठ क्यों मानी जाती है शुभ
सनातन धर्म में 7 अंक को अत्यंत शुभ माना गया है। अनेक धार्मिक परंपराएं जैसे सात ऋषि, सात लोक, सात समुद्र, सात चक्र और विवाह के सात वचन इसके सबसे अच्छे उदाहरण हैं। यही वजह है कि सात गांठों वाला कलावा विशेष शुभता और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। इसे 7 ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा से भी जोड़ा जाता है।
विषम संख्या में ही क्यों लगती हैं गांठें?
धार्मिक परंपराओं में विषम संख्याओं को शुभता और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। दीपक, परिक्रमा और धार्मिक अनुष्ठानों में भी विषम संख्याओं का विशेष महत्व है। इसी मान्यता के चलते कलावा बांधते समय विषम संख्या में ही गांठें लगाई जाती हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)












