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विदेशी निवेश में आएगी तेजी! अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए मोदी सरकार ने उठाया ये कदम

विदेशी निवेश में आएगी तेजी! अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए मोदी सरकार ने उठाया ये कदम

सरकार ने आयकर कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश को मंजूरी दी है. विदेशी निवेश में तेजी के लिए कैबिनेट की तरफ से ये फैसला बनाया गया है. देश में विदेशी पूंजी के प्रवाह को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था पर ईरान युद्ध के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से ये कदम उठाया गया है. ये अध्यादेश राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू होगा. सरकार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की तरफ से भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (G-secs) में किए गए निवेश पर कैपिटल गेन्स टैक्स को पूरी तरह खत्म करेगी.

विदेशी निवेश में आएगी तेजी! अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए मोदी सरकार ने उठाया ये कदम
विदेशी निवेश में आएगी तेजी! अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए मोदी सरकार ने उठाया ये कदम

अभी विदेशी निवेशकों को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखे गए बॉण्ड और लिस्टेड शेयरों पर 12.5% का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स देना होता है. इसके अलावा, उन्हें सरकारी बॉण्ड्स से लिए गए ब्याज पर 20% का विदहोल्डिंग टैक्स भी चुकाना पड़ता है. इस पर 5% की रियायती दर को सरकार ने 2023 में खत्म कर दिया था. इस साल विदेशी निवेशकों ने ₹2.5 लाख करोड़ की भारी बिकवाली की है. इसके बाद से ही टैक्स में कटौती की मांग की जा रही थी. आने वाले समय में कुछ और बड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं.

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सरकार और भी कदम उठा सकती है

सूत्रों के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए भविष्य में और भी अहम कदम उठाए जाने की संभावना है. यह फैसला केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस बयान के कुछ ही दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह लॉन्ग-टर्म और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स पर टैक्स कम करने के बारे में निवेशकों की राय सुनने को तैयार हैं. जुलाई 2024 में पेश किए गए केंद्रीय बजट में, वित्त मंत्री ने ज्यादातर एसेट्स पर LTCG टैक्स की दर को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया था, जबकि लिस्टेड इक्विटी और इक्विटी-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स के लिए छूट की सीमा को बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दिया था.

एटम फाइनेंशियल सर्विसेज के ग्रुप CEO, हर्षा वर्धना VM के अनुसार, ये आंकड़े इतने बड़े हैं कि इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ‘2025 के 12 महीनों में से आठ महीनों में FPIs भारत में नेट सेलर रहे और कुल 1,66,286 करोड़ रुपये का आउटफ्लो हुआ. अकेले जनवरी 2026 में ही 33,598 करोड़ रुपये का आउटफ़्लो हुआ, जो अगस्त 2025 के बाद से सबसे ज्यादा मासिक आउटफ्लो था.

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