रणवीर सिंह, अर्जुन रामपाल और राकेश बेदी स्टारर फिल्म ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज’ में अभिनेता गौरव गेरा ने ‘मोहम्मद आलम’ का किरदार निभा कर लोगों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई। अब फिलहाल अभिनेता इस सफलता को एन्जॉय कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने अब यह बताया है कि इस मुकाम तक पहुंचना उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था। इससे पहले उन्होंने अपनी लाइफ में संघर्ष, आर्थिक कठिनाइयों समेत कई चीजों का सामना कर चुके हैं।

जिस्ट से बात करते हुए गौरव गेरा ने बताया कि उनके परिवार का फिल्म इंडस्ट्री से कोई लेना-देना नहीं था। सबसे पहले आर्ट में उनका इंटरेस्ट स्कूल में हुए फंक्शन्स और फैंसी ड्रेस कॉम्पटिशन से शुरू हुआ। हालांकि, वहां ज्यादा पढ़ाई को प्राथमिकता दी जाती थी। एक्टर ने आगे बताया कि कला और आर्ट में मुझे ए-प्लस मिलता था, लेकिन मैं पढ़ाई में 72 प्रतिशत, 80 प्रतिशत और 82 प्रतिशत नंबर लाने वाला स्टूडेंट था। मुझे लगता था कि जिस चीज में मैं अच्छा हूं, मैं उसे ही नहीं कर रहा।
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फैशन डिजाइनिंग से की करियर की शुरुआत
गौरव ने इंटरव्यू में आगे बताया कि शुरुआत उन्होंने फैशन डिजाइनिंग से की। उन्होंने कहा, “मेरी स्केचिंग अच्छी थी। मैंने कॉलेज ऑफ आर्ट्स में अप्लाई किया, लेकिन नहीं हुआ। फिर मैंने पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन ज्वाइन की। बाद में मुझे लगा ये वो नहीं है, जो मैं करना चाहता हूं। मैंने पापा को बोल दिया कि पैसे बचा लो, बड़ा महंगा कोर्स है, मैं नहीं करूंगा।”
अभिनेता ने अपनी बात जारी रखते हुए आगे बताया कि उनके पापा ने उनसे कहा, “खत्म करो। आधे साल नौकरी कर लेना, फिर जो मन में आए वह कर लेना।” इसके बाद गेरा में ऐसा ही किया आधा साल जॉब की और फिर थिएटर ज्वाइन कर लिया। गेरा ने कहा कि वह इस बात के लिए आभारी हैं कि उनके माता-पिता ने कभी भी अपनी महत्वाकांक्षाओं को उनके ऊपर नहीं थोपा। गेरा ने कहा, “मेरे पापा आईआईटी-बीएचयू से इंजीनियर हैं और भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, लेकिन मुझ पर कुछ थोपा नहीं गया। इसके लिए मैं आभारी हूं।”
बैंक में थे 84 रुपये: गौरव गेरा
मुंबई जाने के बाद गौरव गेरा को जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, उनके बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “मेरे खाते में 84 रुपये थे। मैं एचडीएफसी बैंक के सामने से गुजरता और बैंक को देख कर कहता था कि मेरा ख्याल रखना। मैं आते-जाते बैंक के आगे मत्था टेक के जाता था।”
एक्टर ने आगे बताया कि उनके पिता ने जब भी हुआ उनका समर्थन किया, लेकिन पैसा सीमित होता था। गौरव ने लास्ट में कहा, “हमें वक्त लगता था। ऑटो के पैसे नहीं हैं, तो पेडल से आ जायेंगे। मैं थोड़ा खुद्दार टाइप था। मैं देने वाला बनना चाहता था, लेने वाला नहीं।” फिर यह पूछे जाने पर कि क्या ‘धुरंधर’ की सक्सेस से अहंकार पैदा हुआ है।
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उन्होंने जवाब दिया, “नहीं। शायद 10 साल पहले होती तो आ जाता। अब लगता है ये बस काम है, जो मैंने किया और लोगों को पसंद आया। यह उन कामों में से एक है जो मैंने किया। आज आप रॉकिंग हो, कल नहीं। मैंने इतने उतार-चढ़ाव देखे कि अब फर्क नहीं पड़ता।”
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