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तंबाकू छोड़ने में मददगार बनी राष्ट्रीय हेल्पलाइन, 10 साल में 1 करोड़ कॉल

तंबाकू की लत आज भी भारत में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है. इसे छोड़ना कई लोगों के लिए आसान नहीं होता, लेकिन सही सलाह और निरंतर सहयोग इस सफर को आसान बना सकता है. इसी उद्देश्य से शुरू की गई राष्ट्रीय तंबाकू छोड़ो सेवा (NTQLS) ने अपने 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं. विश्व तंबाकू मुक्ति दिवस 2026 के अवसर पर जारी आंकड़ों के अनुसार, इस हेल्पलाइन को अब तक लगभग 1 करोड़ कॉल प्राप्त हुई हैं और 2.32 लाख से अधिक लोग तंबाकू छोड़ने में सफल रहे हैं. यह सेवा फोन पर मुफ्त सलाह और मार्गदर्शन प्रदान करती है.

तंबाकू छोड़ने में मददगार बनी राष्ट्रीय हेल्पलाइन, 10 साल में 1 करोड़ कॉल
तंबाकू छोड़ने में मददगार बनी राष्ट्रीय हेल्पलाइन, 10 साल में 1 करोड़ कॉल

भारत में करोड़ों लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं, जिससे , फेफड़ों की बीमारी, हार्ट डिजीज और कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में तंबाकू छोड़ने की इच्छा रखने वाले लोगों को सही समय पर मदद और सलाह मिलना बेहद जरूरी है. राष्ट्रीय तंबाकू छोड़ो सेवा इसी उद्देश्य के साथ शुरू की गई थी ताकि देशभर के लोगों तक आसानी से सहायता पहुंचाई जा सके. पिछले एक दशक में इस पहल ने लाखों लोगों तक पहुंच बनाकर तंबाकू कंट्रोल के क्षेत्र में अहम योगदान दिया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस हेल्पलाइन ने पिछले एक दशक में क्या उपलब्धियां हासिल की हैं और तंबाकू कंट्रोल में इसकी क्या भूमिका रही है.

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10 साल में राष्ट्रीय तंबाकू छोड़ो सेवा ने क्या उपलब्धियां हासिल कीं?

30 मई 2016 को शुरू हुई राष्ट्रीय तंबाकू छोड़ो सेवा (NTQLS) ने पिछले 10 वर्षों में तंबाकू कंट्रोल के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं. जारी आंकड़ों के अनुसार, इस हेल्पलाइन को अब तक लगभग 1 करोड़ कॉल प्राप्त हुई हैं. इस दौरान 6.75 लाख से ज्यादा लोगों ने इस सेवा में रजिस्ट्रेशन कराया. इनमें से 2.32 लाख से अधिक लोग तंबाकू छोड़ने में सफल रहे. वहीं, लोगों की मदद के लिए 37 लाख से ज्यादा सलाह और मार्गदर्शन सत्र भी आयोजित किए गए.

डॉ. राज कुमार, निदेशक, वल्लभभाई पटेल चेस्ट संस्थान (VPCI), दिल्ली विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय तंबाकू छोड़ो सेवा (NTQLS) के समन्वयक, ने बताया कि यह सेवा देशभर में तंबाकू छोड़ने के इच्छुक लोगों को मुफ्त और सुलभ सहायता प्रदान कर रही है. वहीं पद्मश्री डॉ. दिगंबर बेहरा, अध्यक्ष, National Academy of Medical Sciences (NAMS) तथा पूर्व डीन एवं विभागाध्यक्ष, पल्मोनरी मेडिसिन विभाग, PGIMER, चंडीगढ़, ने इसे लोगों की सेहत के लिए वैज्ञानिक आधार पर शुरू की गई एक सफल पहल बताया.

तंबाकू छोड़ने में हेल्पलाइन कैसे कर रही है मदद?

राष्ट्रीय तंबाकू छोड़ो सेवा (1800-11-2356) तंबाकू छोड़ना चाहने वाले लोगों को फोन पर मुफ्त सलाह और मार्गदर्शन उपलब्ध कराती है. इस सेवा के तहत विशेषज्ञ लोगों से बात करते हैं, उनकी परेशानियों को समझते हैं और तंबाकू छोड़ने के लिए आवश्यक सलाह देते हैं. इसके साथ ही नियमित फॉलो-अप भी किया जाता है, जिससे लोगों को अपनी कोशिश जारी रखने में मदद मिलती है.

डॉ. राज कुमार के अनुसार, इस हेल्पलाइन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि देश के किसी भी हिस्से में रहने वाला व्यक्ति अपनी भाषा में मुफ्त सलाह प्राप्त कर सकता है. वहीं डॉ. दिगंबर बेहरा का मानना है कि फोन आधारित यह मॉडल उन लोगों तक भी पहुंच सकता है, जहां तंबाकू मुक्ति क्लिनिक उपलब्ध नहीं हैं.

युवाओं और राज्यों में कैसा रहा इस सेवा का प्रभाव?

आंकड़ों के अनुसार, तंबाकू छोड़ने वालों में सबसे बड़ा समूह 18 से 24 वर्ष आयु वर्ग का रहा, जिसमें 91,933 युवा शामिल हैं. इससे पता चलता है कि युवाओं में तंबाकू छोड़ने को लेकर जागरूकता बढ़ रही है. राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 2.09 लाख रजिस्ट्रेशन हुए, जबकि राजस्थान 1.49 लाख रजिस्ट्रेशन के साथ दूसरे प्रमुख राज्यों में शामिल रहा.

विशेषज्ञों का कहना है कि आसान पहुंच, मुफ्त सलाह और लगातार फॉलो-अप की वजह से इस सेवा का प्रभाव देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक पहुंचा है. यही कारण है कि राष्ट्रीय तंबाकू छोड़ो सेवा आज भारत में तंबाकू कंट्रोल की सबसे अहम पहलों में से एक मानी जा रही है.

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