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अदाणी विझिनजाम पोर्ट का नया इतिहास, ऑपरेशन के 18 महीनों में 2 मिलियन TEUs हैंडल करने वाला सबसे तेज़ भारतीय बंदरगाह बना

अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) द्वारा विकसित और संचालित ‘अदाणी विझिनजाम इंटरनेशनल सीपोर्ट’ ने वैश्विक समुद्री व्यापार में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह इंटरनेशनल पोर्ट वाणिज्यिक परिचालन (कमर्शियल ऑपरेशन) शुरू होने के मात्र $18$ महीनों के भीतर $2$ मिलियन ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट्स (TEUs) का लैंडमार्क कार्गो वॉल्यूम हैंडल करने वाला भारत का सबसे तेज़ बंदरगाह बन गया है।

अदाणी विझिनजाम पोर्ट का नया इतिहास, ऑपरेशन के 18 महीनों में 2 मिलियन TEUs हैंडल करने वाला सबसे तेज़ भारतीय बंदरगाह बना
अदाणी विझिनजाम पोर्ट का नया इतिहास, ऑपरेशन के 18 महीनों में 2 मिलियन TEUs हैंडल करने वाला सबसे तेज़ भारतीय बंदरगाह बना

विझिनजाम पोर्ट ने जुलाई $2024$ में अपना ट्रायल रन शुरू किया था, जिसके बाद मई $2025$ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे आधिकारिक रूप से राष्ट्र को समर्पित किया। इसके बाद केवल तीन महीने के भीतर, यानी अगस्त $2025$ में इसने $1$ मिलियन TEU का आंकड़ा पार किया और अब $18$ महीने के भीतर $2$ मिलियन TEU की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर अपनी परिचालन क्षमता का लोहा मनवाया है।

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वैश्विक संकट के बीच भारत का रणनीतिक ‘गेम चेंजर’

यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भू-राजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई-चेन और शिपिंग रूट्स लगातार बाधित हो रहे हैं। हिंद महासागर कॉरिडोर (IOR) पर विझिनजाम की रणनीतिक स्थिति उन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लाइनों के लिए एक वरदान साबित हो रही है जो सुरक्षित मार्ग, परिचालन दक्षता और कम टर्नअराउंड समय चाहती हैं।

  • मेगा जहाजों की पहली पसंद: परिचालन शुरू होने से अब तक विझिनजाम ने $950$ से अधिक जहाजों को सफलतापूर्वक हैंडल किया है। इनमें $67$ अल्ट्रा लार्ज कंटेनर वेसल (ULCV) शामिल हैं, जिनकी लंबाई लगभग $400$ मीटर है।
  • दुनिया के सबसे बड़े जहाजों की मेजबानी: इस पोर्ट पर दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाज ‘MSC इरिना’ और किसी भारतीय पोर्ट पर आने वाले सबसे गहरे ड्राफ्ट वाले जहाजों में से एक ‘MSC वेरोना’ को भी डॉक किया जा चुका है।

प्राकृतिक बनावट और भौगोलिक स्थिति का बड़ा फायदा

विझिनजाम इंटरनेशनल ईस्ट-वेस्ट शिपिंग रूट से महज $10$ नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है। यह एशिया, मिडिल ईस्ट, यूरोप और अफ्रीका के व्यापारिक मार्गों के बिल्कुल केंद्र में है।

20 मीटर का नेचुरल डीप ड्राफ्ट: विझिनजाम पोर्ट का सबसे बड़ा तकनीकी फायदा इसका लगभग $20$ मीटर का प्राकृतिक गहरा ड्राफ्ट है। इसके कारण दुनिया के सबसे विशालकाय जहाजों को बिना किसी अतिरिक्त और भारी ड्रेजिंग (मिट्टी हटाने) के आसानी से डॉक किया जा सकता है, जिससे शिपिंग कंपनियों का ईंधन और ट्रांजिट समय दोनों बचता है।

दशकों से भारत का एक बड़ा ट्रांसशिपमेंट कार्गो कोलंबो, सिंगापुर या दुबई जैसे विदेशी बंदरगाहों के जरिए रूट होता रहा है। विझिनजाम के इस तीव्र विकास से अब विदेशों पर भारत की यह निर्भरता काफी कम होगी और देश का राजस्व देश में ही सुरक्षित रहेगा।

₹16,000 करोड़ का फेज-2 विस्तार और APSEZ का दबदबा

वर्तमान में विझिनजाम पोर्ट के ‘फेज-2’ के विस्तार का काम तेजी से चल रहा है। इसमें लगभग ₹$16,000$ करोड़ का भारी-भरकम निवेश किया जा रहा है, जिसे साल $2028$ तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस विस्तार के बाद पोर्ट की कंटेनर हैंडलिंग क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे भारत के आयात-निर्यात (EXIM) को एक नई वैश्विक रफ्तार मिलेगी।

उल्लेखनीय है कि इसकी पैरेंट कंपनी APSEZ भी हाल ही में एक वर्ष में $500$ मिलियन मीट्रिक टन (MMT) से अधिक कार्गो संभालने वाली देश की पहली एकीकृत परिवहन ऑपरेटर बन चुकी है, जिसने भारत के निजी पोर्ट सेक्टर में अपने एकाधिकार को और मजबूत किया है।

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