भारत दुनिया में सबसे ज्यादा आम उगाता है. यहां हर साल 24 मिलियन मीट्रिक टन आम पैदा होता और दुनिया के कई देश इसे आयात करते हैं. इसके उलट जापान ने भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगा दिया है. वह इसका आयात नहीं करेगा. प्रतिबंध से पहले तक जापान आमतौर पर भारत से आमों की कई किस्में आयात करता रहा है. इनमें केसर, अल्फांसो, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी किस्में सबसे ज्यादा जापान भेजी जाती रही हैं.

जापान ने ऐसा पहली बार नहीं किया है. साल 1986 में, फल मक्खियों के प्रकोप के मामले सामने आने के बाद भारतीय आमों के आयात पर रोक लगा दी थी. इसके बाद यह प्रतिबंध 20 सालों तक जारी रहा. फिर जून 2006 में हुई टेस्टिंग में यह पुष्टि हुई कि भारतीय आमों से बीमारियों और कीटों का खतरा नहीं है. इसके बाद जापान ने फिर से भारतीय आमों को खरीदना शुरू किया. अब एक बार फिर लगे प्रतिबंध ने पुरानी कहानी ताजा कर दी है. बैन लगने के बाद सवाल उठता है कि जापान ने इस बार यह कदम क्यों उठाया, भारत में कहां होता है आमों का सबसे ज्यादा प्रोडक्शन और किस राज्य में कौन सा आम पैदा होता है. जानिए, इसका जवाब.
जापान ने क्यों बैन किया भारतीय आम?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आमों के निर्यात से पहले जापान से एक टीम आती है और जांच करती है. यहां के वेपर हीट ट्रीटमेंट की जांच करती है. यह ऐसा तरीका है जिसमें यह देखा जाता है कि आमों पर कीटनाशक का असर न हो और इसे केमिकल से न पकाया गया हो. इस साल जब टीम जांच करने के लिए उत्तर प्रदेश के रहमानपुर पहुंची और कई कमियां मिलीं.
जापान में भारतीय आमों की बहुत मांग है. फोटो:Pixabay
जापान के संगठन, योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने नोटिफिकेशन जारी करके कहा है कि 25 मार्च, 2025 या उससे बाद भारत द्वारा जारी प्रमाण पत्रों वाले आमों की खेप स्वीकार नहीं की जाएगी. संगठन ने यह भी कहा है कि भारतीय आमों का आयात तब तक बंद रहेगा जब तक टोक्यो के अधिकारी पुष्टि नहीं करते कि मानकों में सुधार हो गया है.
जापान में भारतीय आमों की बहुत मांग है. साल 2025 में, टोक्यो ने 15 लाख डॉलर मूल्य के भारतीय आमों का आयात किया था. इसमें सबसे ज्यादा मात्रा गुजरात के केसर किस्म आमों की थी. इनकी कीमत 02 लाख डॉलर का था.
आंकड़े मीट्रिक टन में.
क्या जापान भारतीय आमों का सबसे बड़ा खरीदार?
जापान की तरफ से आए हालिया बयान के बाद सवाल उठता है कि क्या यह देश भारतीय आमों का सबसे बड़ा खरीदार है. इसका जवाब है- नहीं. जापान भारतीय का सबसे बड़ा खरीदार नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह भारत समेत कई देशों से आम खरीदता है.
थाइलैंड, ताइवान, मेक्सिको आम की सप्लाई करते हैं. अब पाकिस्तान और वियतनाम भी यहां आमों को एक्सपोर्ट करने लगे हैं. ताइवान ने भी टोक्यो को आम की बड़ी खेप भेजी है.
जापान का फैसला भारत के लिए कितना बड़ा झटका?
भारतीय आमों को रोकने के लिए जापान ने जो ऐलान किया है वो एक बड़ा झटका कई मायनों में है. पहली बात, निर्यातकों का कहना है कि यूं तो जापान आमों का सबसे बड़ा खरीदार नहीं है, लेकिन जिस तरह से पश्चिम एशिया में चले तनाव से व्यापार को नुकसान हुआ है. मौसम का झटका फसल के लिए टेंशन बढ़ाने वाला साबित हुआ और जापान का फैसला, यह मिलकर आमों के व्यापार के लिए बुरा साबित हुए हैं. निर्यात में 30 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई. इसके बाद ऐसे बैन लगना बड़ा झटका है.
Khabar Monkey
गर्मी की शुरुआत में पहले ही जिस तरह आंधी-बारिश ने फसल को नुकसान पहुंचाया है, उसने आम के कारोबार को झटका लगा है, जिसका 2025 में 56 मिलियन डॉलर का अनुमान लगाया गया था.





