8वें वेतन आयोग का गठन हुए एक साल पूरा हो गया है, जिसको 18 महीने में ड्राफ्ट और सिफारिशें सरकार को सौपनी हैं. जिसके बाद सरकार केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी करेगी. ऐसे में इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन ने 8 वें वेतन आयोग के सामने वेतन बढ़ोतरी को लेकर कुछ प्रस्ताव रखें हैं, जिनको लेकर चर्चाए काफी तेज हो गई हैं.

इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन ने अलग-अलग पे लेवल के कर्मचारियों के लिए अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग की है. अगर सरकार इन मांगो को मान लेती है तो कुछ वरिष्ठ कर्मचारियों की सैलरी में 400 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है. आइए जानते हैं किस तरीके से इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन के कर्मचारियों की सैलरी में 400 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है.
क्या है फिटमेंट फैक्टर का पूरा खेल
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है, जिसके जरिए मौजूदा बेसिक वेतन को बढ़ाकर नई सैलरी तय की जाती है. सरल शब्दों में कहें तो.
नई बेसिक सैलरी = मौजूदा बेसिक सैलरी × फिटमेंट फैक्टर
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7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था. लेकिन इस बार कर्मचारी संगठन इससे कहीं ज्यादा बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं.
IRTSA के प्रस्ताव के मुताबिक
- लेवल 1 से 5 तक के कर्मचारियों के लिए फिटमेंट फैक्टर 2.92
- लेवल 6 से 8 के लिए 3.50
- लेवल 9 से 12 के लिए 3.80
- लेवल 13 से 16 के लिए 4.09
- लेवल 17 और 18 के लिए 4.38
अगर यह लागू होता है, तो 2.5 लाख रुपये बेसिक सैलरी पाने वाले वरिष्ठ कर्मचारी की नई बेसिक सैलरी करीब 10.95 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. वहीं 45 हजार रुपये बेसिक वेतन पाने वाले मिड-लेवल कर्मचारी की सैलरी बढ़कर लगभग 1.57 लाख रुपये हो सकती है.
कर्मचारियों की और क्या मांगें हैं
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा वेतन व्यवस्था में जूनियर और सीनियर कर्मचारियों की सैलरी के बीच अंतर काफी कम हो गया है. खासकर रेलवे के तकनीकी कर्मचारियों को अलग वेतन ढांचा देने की मांग उठाई गई है. इसके अलावा 5 फीसदी वार्षिक इंक्रीमेंट, 50 फीसदी महंगाई भत्ता बेसिक में जोड़ने और तेज प्रमोशन जैसी मांगें भी रखी गई हैं.
सरकार के सामने क्यों मुश्किल बढ़ी
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी वेतन बढ़ोतरी सरकार के लिए वित्तीय दबाव बढ़ा सकती है. क्योंकि सैलरी बढ़ने के साथ पेंशन, भत्ते और रिटायरमेंट से जुड़े खर्च भी तेजी से बढ़ेंगे. इतना ही नहीं, केंद्र सरकार के बाद कई राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों के वेतन में संशोधन करती हैं, जिससे कुल आर्थिक बोझ और ज्यादा बढ़ जाता है.
OPS और फैमिली यूनिट पर भी बहस तेज
पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को लेकर भी बहस फिर तेज हो गई है. कई कर्मचारी संगठन OPS बहाल करने की मांग कर रहे हैं. हालांकि अब कुछ संगठन पूरी वापसी के बजाय OPS जैसी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं. इसके साथ ही फैमिली यूनिट फॉर्मूला 3 से बढ़ाकर 5 करने की मांग भी जोर पकड़ रही है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई, शिक्षा, इलाज और घर के खर्चों के कारण आज परिवारों पर आर्थिक दबाव पहले से कहीं ज्यादा है.
8th Pay Commission की सिफारिशों का असर 1.1 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों पर पड़ने की उम्मीद है. ऐसे में आने वाले महीनों में आयोग की बैठकों और फैसलों पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी.





