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यूपी विधानसभा चुनाव 2027 समय से पहले होने की अटकलें,जानिए क्या है कानूनी पहलू ?

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इन दिनों एक बेहद चौंकाने वाली चर्चा तेजी से फैल रही है कि क्या साल 2027 का आगामी विधानसभा चुनाव अपने तय समय से कुछ हफ्ते पहले कराया जा सकता है? हालांकि अभी तक इस संबंध में न तो भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से कोई आधिकारिक संकेत आया है और न ही केंद्र या राज्य सरकार ने कोई औपचारिक बयान दिया है। इसके बावजूद यह संभावना लगातार चर्चा में बनी हुई है कि फरवरी-मार्च 2027 के बजाय चुनाव दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच कराए जा सकते हैं।

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 समय से पहले होने की अटकलें,जानिए क्या है कानूनी पहलू ?
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 समय से पहले होने की अटकलें,जानिए क्या है कानूनी पहलू ?

प्रस्तावित जनगणना और चुनाव के बीच टकराव की आशंका
इन अटकलों के पीछे सबसे बड़ी वजह साल 2026 की देशव्यापी जनगणना को माना जा रहा है, जिसका दूसरा और वास्तविक जनसंख्या गणना का चरण फरवरी 2027 में प्रस्तावित है। इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों, जिला प्रशासन और स्थानीय मशीनरी की जरूरत पड़ती है—और यही वे संसाधन हैं जिनका इस्तेमाल विधानसभा चुनावों के दौरान भी होता है। ऐसे में चुनाव और जनगणना दोनों का एक साथ संचालन प्रशासनिक दृष्टि से बेहद कठिन माना जा रहा है। मामले की जानकारी रखने वाले कुछ अधिकारियों का कहना है कि चुनाव आयोग के सामने यह व्यावहारिक चुनौती जरूर आएगी कि वह जनगणना और चुनाव के बीच संतुलन कैसे बनाए।

क्या कहता है संवैधानिक और कानूनी गणित?
उत्तर प्रदेश विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा, क्योंकि 18वीं विधानसभा की पहली बैठक 23 मई 2022 को हुई थी। संवैधानिक विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार सिंह के अनुसार, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 15(2) के तहत चुनाव आयोग तकनीकी रूप से विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से छह महीने पहले (यानी नवंबर 2026 के बाद) कभी भी चुनाव कार्यक्रम घोषित कर सकता है।

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उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में भी 2027 की पहली तिमाही में चुनाव होने हैं। यदि आयोग इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाता है, तो इन सभी राज्यों में मतदान जनवरी 2027 तक पूरा कराने की कोशिश की जा सकती है। फिलहाल, मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय का कहना है कि तैयारियां सामान्य समय-सीमा के अनुसार ही चल रही हैं, लेकिन सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी इस संभावना को गंभीरता से लेते हुए अपनी आंतरिक तैयारियां तेज कर दी हैं।

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