उत्तर प्रदेश में अघोषित बिजली कटौती पर लोगों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है. प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज करनी शुरू कर दी है. बिजली सब-स्टेशंस पर PAC की तैनाती की गई है. लेकिन बत्ती गुल होने की मूल समस्या बनी हुई है. लखनऊ के अलग-अलग सब स्टेशनों पर लोगों ने हंगामा किया. इस दौरान पुलिस तमाशबीन बनी रही.
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मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने लखनऊ के संवेदनशील 33/11 केवी उपकेंद्रों पर विशेष अधिकारियों की तैनाती की है. रात में बढ़ते बिजली लोड और फॉल्ट की घटनाओं को देखते हुए आदेश जारी किया गया है. 23 मई से 31 मई 2026 तक विशेष ड्यूटी व्यवस्था लागू रहेगी. उपभोक्ताओं की शिकायतों का तत्काल निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारी बिजली आपूर्ति बाधित होने पर मौके पर रहकर समाधान करेंगे. शाम की पीक डिमांड के दौरान ट्रांसफॉर्मर और फीडरों की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी.
लोगों ने जमकर किया हंगामा
फैजुल्लागंज सब स्टेशन पर लोगों ने हंगामा किया. सब स्टेशन पर हालात ये हैं कि बिजली कर्मियों को ग्रिल अंदर से बंद कर के रखना पड़ रहा है, वो ग्रिल के भीतर से ही लोगों से बात कर रहे हैं. तीन-चार दिन से रातों में हंगामा हो रहा था आज भी हंगामा किया गया. ये समस्या केवल एक सब स्टेशन या जिले की नहीं है. प्रशासन ने खुद लखनऊ और आसपास के क्षेत्र में 31 सब स्टेशंस को संवेदनशील इलाके मानते हुए वहां PAC की तैनाती की है.
वहीं इस मामले में अब राजनीति भी शुरू हो गई है.ऊर्जा मंत्री ने विपक्ष के हमले का जवाब देते हुए यूपी में बिजली आपूर्ति के 14 साल आंकड़े पोस्ट करते हुए कहा कि पिछली सरकारों की तुलना में डिमांड दुगनी से ज्यादा बढ़ी है. वो इसको पूरा भी कर रहे हैं.
सैकड़ों नए ट्रांसफॉर्मर पहुंचे
लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित पॉवर हाउस पर ट्रकों में भर कर ब्रांड न्यू ट्रांसफॉर्मर पहुंच रहे हैं. हैवी लोड केबल्स के ढेर लगे दिखाई दिए. इसके अलावा फ्यूज़, स्विचर्स कंडक्टर्स समेत तमाम संसाधन उपलब्ध दिखे हैं, जो किसी भी शहर की बिजली व्यवस्था को वर्ल्ड क्लास बना दे.
साल दर साल बिजली का लोड तो बढ़ रहा है लेकिन पॉकेट्स में उस हिसाब से ट्रांसफॉर्मर्स, केबल्स, स्वीचर्स, फ्यूज़ आदि को अपग्रेड नहीं किया गया. विशेषज्ञ बताते हैं कि संकट बिजली की कमी से ज़्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर के फेल होने से अचानक बढ़ी डिमांड मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर संभाल नहीं पा रहा. क्षमता से अधिक लोड उठाने पर ट्रांसफार्मर खराब हो रहे हैं. कमजोर और पुराने तार वोल्टेज की समस्या झेल नहीं पा रहे बड़ी संख्या में तकनीकी ख़राबी को ठीक करने में देरी हो रही.
क्यों हो रही परेशानी?
हाल में ही संविदा कर्मियों की संख्या में कमी की गई है. नए कर्मचारी और मजदूरों की भर्ती नहीं की जा रही. लेबर शॉर्टेज एक बड़ा इशू है लेकिन इस पर काम नहीं किया गया. जिसका नतीजा, ब्रेक डाउन की स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम डिले होना है. टेक्निकल फॉल्ट को तुरंत ठीक नहीं कर पाना है. घंटों इंतजार करने के बाद लोग आक्रोशित होते हैं. फ्यूज़ बदलने जैसे काम में भी घाटों का इंतजार करना पड़ रहा है.





