Indians Investment In Abroad: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच दुनियाभर में तनाव का माहौल है. इसका असर क्रूड ऑयल से लेकर दुनियाभर के शेयर बाजार पर देखा जा रहा है. भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ दिन से गिरावट से जूझ रहा है. विदेशी निवेशक बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. इस बीच एक रिपोर्ट से सामने आया है कि भारतीयों के बीच विदेशों में पैसा लगाने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. मौजूदा दौर में विदेश में निवेश करना भारतीयों के लिए पैसा बाहर भेजने यानी रेमिटेंस का तेजी से बढ़ता जरिया बन गया है.

आरबीआई (RBI) की तरफ से जारी किये गए मई के बुलेटिन के अनुसार विदेशों में होने वाला इन्वेस्टमेंट मार्च 2025 के 306.30 मिलियन डॉलर के मुकाबले मार्च 2026 में 440.22 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया है. यह सालाना आधार पर 43.7 फीसदी का भारी उछाल है. साल के शुरुआती महीनों के रुझान को देखें तो जनवरी में यह आंकड़ा 178.86 मिलियन डॉलर और फरवरी में 265.99 मिलियन डॉलर रहा. यही आंकड़ा मार्च के महीने में बढ़कर 440.22 मिलियन डॉलर हो गया.
विदेशों में निवेश दोगुने से भी ज्यादा हुआ
इस आंकड़े से यह साफ है कि महज तीन महीने के अंदर ही भारतीयों की तरफ से विदेशों में किया जाने वाला निवेश दोगुने से भी ज्यादा हो गया. देशवासियों के बदलते रुख के पीछे इंटरनेशनल मार्केट में अपना पोर्टफोलियो मजबूत करने की चाहत है. भारतीय अब घरेलू बाजार के साथ विदेशी डेब्ट इंस्ट्रूमेंट और विदेशी कंपनियों के शेयरों में जमकर पैसा लगा रहे हैं. इस ट्रेंड में तेजी आने का बड़ा कारण कई इंटरनेशनल ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म का आसान होना भी है. इन प्लेटफॉर्म के जरिये घर बैठकर विदेशों में निवेश करना आसान हो गया है.
सबसे बड़ा हिस्सा घूमने-फिरने यानी ट्रैवल का
भले ही निवेश की रफ्तार तेज हुई हो. लेकिन विदेशों में भेजे जाने वाले पैसे में आज भी सबसे बड़ा हिस्सा घूमने-फिरने यानी ट्रैवल का ही है. आरबीआई ने पहली बार इस डेटा को अलग-अलग पेश किया है. मार्च 2026 में ट्रैवल के लिए कुल 1,004.60 मिलियन डॉलर बाहर भेजे गए. यह पिछले साल के मुकाबले 10.7 प्रतिशत कम है. यदि हम बारीकी से देखें तो छुट्टियों और इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड के भुगतान पर सबसे ज्यादा 623.05 मिलियन डॉलर खर्च हुए.
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विदेशी बैंक अकाउंट जमा कर रहे पैसे
इसके बाद विदेशी संस्थानों में पढ़ाई, हॉस्टल और रहने के खर्च के लिए 450.16 मिलियन डॉलर की राशि भेजी गई. इससे एजुकेशन पर बढ़ता खर्च साफ हुआ. बिजनेस ट्रैवल के लिए 16.05 मिलियन डॉलर, इलाज के लिए 2.79 मिलियन डॉलर और तीर्थयात्रा के लिए 2.55 मिलियन डॉलर बाहर भेजे गए. इस डेटा से साफ हुआ है कि भारतीय नागरिक फाइनेंशियल ईयर के अंत में विदेशी बैंक अकाउंट में अपना पैसा डिपॉजिट करना पसंद कर रहे हैं.
263 प्रतिशत का भारी उछाल आया
जनवरी 2026 में विदेशों में जमा पैसा महज 48.60 मिलियन डॉलर था, जो मार्च 2026 में बढ़कर 176.35 मिलियन डॉलर हो गया. केवल दो महीने के अंदर विदेशी बैंक खातों में जमा होने वाली इस रकम में 263 प्रतिशत का भारी उछाल आया है. एक तरफ शेयर मार्केट और बैंक अकाउंट में पैसा लगाने की होड़ है, वहीं विदेशों में जमीन या मकान खरीदने के मामले में भारतीयों का आकर्षण कम हुआ है. मार्च 2025 में विदेशों में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए 45.10 मिलियन डॉलर भेजे गए थे, जो मार्च 2026 में 14.2 प्रतिशत घटकर 38.68 मिलियन डॉलर रह गए.
क्या कहती है रेमिटेंस की पूरी तस्वीर?
यदि कुल मिलाकर भेजे जाने वाले पैसे की बात करें तो मार्च 2025 में यह आंकड़ा 2,547.57 मिलियन डॉलर था. फरवरी 2026 में यह गिरकर 2,338.60 मिलियन डॉलर हुआ और मार्च 2026 में संभलकर 2,594.87 मिलियन डॉलर पहुंच गया. आरबीआई की एलआरएस (LRS) के तहत वित्त वर्ष 2024-25 में 29,563 मिलियन डॉलर बाहर भेजे गए. इस पूरे सिनेरियो में ट्रैवल और परिवार के भरण-पोषण का दबदबा भले ही कायम हो, लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली और ध्यान खींचने वाली सफलता विदेशी शेयर व बॉन्ड बाजार में निवेश की रही है.





