Ganga Snan Niyam: गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाते हैं जो इस साल 25 मई 2026, सोमवार को पड़ रहा है. मान्यता है कि इसी दिन गंगा मां स्वर्ग से धरती पर प्रकट अवतरित हुईं थीं. इसलिए यह दिन गंगा मां की कृपा पाने के लिए सबसे खास होता है. गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से 10 महापाप नष्ट होते हैं और अक्षय पुण्य प्राप्त होता है. लेकिन गंगा स्नान में की गई गलतियां स्नान के फल को खत्म कर सकती हैं और पाप का भागीदार भी बना सकती हैं.

गंगा स्नान में न करें ये गलतियां
गंगा स्नान करते समय धर्म-शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन जरूरी है, जानिए पवित्र गंगा नदी में स्नान करते समस कौन-सी गलतियां न करें.
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महिलाओं के खुले बाल : गंगा नदी में स्नान करते समय महिलाएं अपने बाल खुले न रखें. बाल बांधकर ही नदी के जल में प्रवेश करें.
अपवित्र स्थिति में स्नान : यदि घर में सूतक लगा हो, महिलाएं पीरियड्स में हों तो इस दौरान गंगा नदी में स्नान न करें.
डुबकी की संख्या : गंगा नदी में डुबकी लगाने से पाप धुलते हैं. इसके लिए शास्त्रों में डुबकी लगाने की संख्या भी बताई गई है. हमेशा 1, 3, 5, 7, 11 की विषम संख्या में डुबकी लगाएं. इसे मजाक में न लें और संख्या का ध्यान रखें. साथ ही डुबकी लगाते समय गंगा मैया और भगवान विष्णु का स्मरण करें, उनसे पापों को क्षमा करने की प्रार्थना करें.
बिना कपड़ों के गंगा स्नान: कभी भी गंगा नदी में बिना कपड़ों के स्नान न करें. आमतौर पर कई लोग नदी में प्रवेश करने से पहले कपड़े उतारकर किनारे पर रख देते हैं. जबकि शास्त्रों के अनुसार बिना वस्त्र के पवित्र नदी में स्नान करना शुभ नहीं माना जाता है और इसे भगवान का अपमान माना जाता है.
कपड़े धोना : गंगा स्नान के बाद गंगा नदी में कपड़े धोने की भारी भूल न करें. ऐसा करना वर्जित है. कपड़े घर लाकर ही धोएं. न ही गंगा नदी में स्नान करते समय साबुन, शैंपू आदि का इस्तेमाल करें.
कुल्ला, मल-मूत्र त्याग: गंगा नदी के जल का आचमन करें लेकिन उससे कुल्ला करने की भारी भूल न करें. न ही नदी में मल-मूत्र त्याग करें. ऐसा करना आपको महापाप का भागीदान बनाता है.
गंगा स्नान की सही विधि
गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करते समय सही विधि का पालन करें. नदी के जल में प्रवेश करने से पहले गंगा मईया को दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करें. फिर, जल में पांव रखने के लिए गंगा मईया से क्षमा मांगनी चाहिए. इसके बाद ही माता के आशीर्वाद के साथ गंगा नदी में प्रवेश करें और डुबकी लगाएं. इस दौरान गंगा माता का स्मरण करें, पापों को नष्ट करने की प्रार्थना करें. स्नान के बाद गंगा पूजन करें. आरती गाएं. ऐसा करने से ही गंगा स्नान का पूरा फल मिलता है और पाप धुलते हैं.





