Bhopal Twisha Medical Report: भोपाल के कटारा हिल्स में नोएडा निवासी ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है. एक तरफ पुलिस इसे संदिग्ध आत्महत्या मानकर जांच कर रही है, तो वहीं दोनों परिवारों के आरोप-प्रत्यारोप ने केस को और संवेदनशील बना दिया है. अब इस मामले में मानसिक स्वास्थ्य और कथित सिज़ोफ्रेनिया का एंगल भी सामने आया है. ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने दावा किया है कि ट्विशा मानसिक तनाव, एंग्जायटी और सिज़ोफ्रेनिया जैसी समस्याओं के इलाज में थीं. उनके मुताबिक, ट्विशा को काउंसलिंग और दवाइयां दी जा रही थीं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम मेडिकल निष्कर्ष विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा.

इधर ट्विशा के परिवार ने इन दावों पर सवाल उठाए हैं. परिवार का कहना है कि मामला मानसिक बीमारी का नहीं बल्कि दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का है. परिवार ने दोबारा पोस्टमार्टम और न्यायिक निगरानी में जांच की मांग की है.
भोपाल के मनोचिकित्सक के पास ट्विशा के इलाज का दावा किया जा रहा है. अब वो मनोचिकित्सा डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी भी सामने आए है. उन्होंने बताया कि ट्विशा शर्मा उनके क्लिनिक में इलाज के लिए पहुंची थीं. हालांकि, मरीज की निजता और मेडिकल प्राइवेसी का हवाला देते हुए उन्होंने उपचार और दवाइयों से जुड़ी कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की.
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इस बीच सवाल उठ रहा है कि आखिर सिज़ोफ्रेनिया क्या है?
वरिष्ठ मनोचिकित्सक ने बताया कि सिज़ोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की सोच, व्यवहार और भावनाओं पर गहरा असर पड़ता है. मरीज को अक्सर भ्रम, शक, डर और ऐसी आवाजें सुनाई देने जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं. कई बार मरीज अपने करीबी लोगों पर भी संदेह करने लगता है, जिससे रिश्तों और सामाजिक जीवन पर असर पड़ता है.
डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज, काउंसलिंग और नियमित दवाइयों से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. लेकिन इलाज में लापरवाही मरीज की स्थिति को गंभीर बना सकती है.
फिलहाल, ट्विशा शर्मा मौत मामले में पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है. मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े दावों की भी पड़ताल की जा रही है. हालांकि, अभी तक किसी भी जांच एजेंसी ने सिज़ोफ्रेनिया या मानसिक बीमारी को मौत का कारण नहीं माना है. ऐसे में अंतिम सच्चाई जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकेगी.





