विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने इबोला बीमारी को अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित कर दिया है। यह घोषणा WHO के डायरेक्टर जनरल ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैल रही इस बीमारी के बाद किया। बता दें कि यह बीमारी बंडी बुग्गियो वायरस के कारण फैलती है। लेकिन इसी के साथ ही WHO ने यह भी साफ किया है कि फिलहाल यह स्थिति पेंडेमिक इमरजेंसी यानी महामारी आपात स्थिति के मानदंडों को पूरा नहीं करती। इसका मतलब यह है कि बीमारी गंभीर तो है लेकिन अभी कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के स्तर पर नहीं पहुंची है। WHO ने यह फैसला इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशन 2005 के अनुच्छेद 12 के तहत किया है। इस बात की जानकारी WHO की सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर साझा की गई है।

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साझा पोस्ट के मुताबिक डायरेक्टर जनरल ने यह निर्णय लेने से पहले कांगो और युगांडा की सरकारों से सलाह मशवरा किया। बता दें कि इन दोनों जगहों पर फिलहाल यह बीमारी फैली हुई है। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक शनिवार तक कांगो के इटोरी प्रांत में कम से कम तीन स्वास्थ्य क्षेत्रों, बुनिया, स्वानपारा और मोगोब्वालू में इस बीमारी से 80 संदिग्ध मौतें हो चुकी हैं। इनमें आठ मामलों की पुष्टि भी हो चुकी है। जबकि 246 संदिग्ध केस सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनिमय के प्रोविजन के तहत WHO के महानिदेशक जल्द ही इमरजेंसी कमेटी की एक बैठक बुलाएंगे।
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इस वायरस से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोऑर्डिनेशन की जरूरत मानी जा रही है ताकि प्रकोप की गंभीरता और फैलाव को समझा जा सके। इसके साथ ही निगरानी रोकथाम की कोशिशों को कामयाब बनाया जा सके। पीएचईआईसी यानी पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न घोषित किए जाने के बाद अब सभी सदस्य देश इस बीमारी को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाएंगे। वे यात्रा संबंधी दिशा निर्देश जारी कर सकते हैं और संसाधन जुटाएंगे। अभी इंटरनेशनल ट्रेवल पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। फिलहाल भारत जैसे देशों को कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है। यानी कहने का मतलब यह कि इससे पैनिकिक की स्थिति में आने की जरूरत नहीं है।





