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रोज नाश्ते में Oats क्यों नहीं खाना चाहिए? एक्सपर्ट से जानिए फायदे और साइड इफेक्ट भी

वजन घटाना हो, दिल को स्वस्थ रखना हो या कोलेस्ट्रॉल कम करना हो, इन सभी परेशानियों से बचने के लिए आजकल हर दूसरा व्यक्ति सुबह के नाश्ते में ओट्स (Oats) खाना पसंद करता है। ओट्स को हेल्दी डाइट का हिस्सा और एक तरह का ‘सुपरफूड’ माना जाता है। हालांकि, किसी भी चीज का जरूरत से ज्यादा सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि रोजाना नाश्ते में ओट्स खाना, खासकर बाजार में मिलने वाले फ्लेवर्ड या इंस्टेंट ओट्स, हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद नहीं होता। लगातार और जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर पेट फूलना (Bloating), गैस और कुछ पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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रोज नाश्ते में Oats क्यों नहीं खाना चाहिए? एक्सपर्ट से जानिए फायदे और साइड इफेक्ट भी
रोज नाश्ते में Oats क्यों नहीं खाना चाहिए? एक्सपर्ट से जानिए फायदे और साइड इफेक्ट भी

Gastro Liver Hospital के डॉक्टर वी.के. मिश्रा ने ओट्स को लेकर लोगों के मन में उठने वाले कई सवालों के जवाब दिए। उन्होंने बताया कि ओट्स पोषण से भरपूर होते हैं, लेकिन इन्हें रोजाना और अधिक मात्रा में खाने से कुछ लोगों में दिक्कतें भी देखने को मिल सकती हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक ओट्स को संतुलित मात्रा में और सीमित दिनों तक खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है। आइए जानते हैं कि रोजाना ओट्स खाने से शरीर पर क्या असर पड़ सकता है और इसे कितनी मात्रा में खाना सुरक्षित माना जाता है।

ओट्स जल्दी बनने वाला हेल्दी ब्रेकफास्ट

डॉक्टर के अनुसार आजकल लोगों का लाइफस्टाइल काफी व्यस्त हो गया है। ऐसे में कई लोग ऐसा नाश्ता पसंद करते हैं जो जल्दी तैयार हो जाए। ओट्स इसी वजह से काफी लोकप्रिय हो चुके हैं और कई लोग इन्हें रोजाना ब्रेकफास्ट में शामिल करने लगे हैं।

रोज ओट्स खाने के सेहत को नुकसान

बढ़ता है ग्लूटेन सेंसिटिविटी का खतरा

ओट्स प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-फ्री होते हैं, लेकिन इन्हें जिन फैक्ट्रियों में प्रोसेस किया जाता है वहां गेहूं भी प्रोसेस होता है। ऐसे में क्रॉस-कंटैमिनेशन की वजह से कुछ लोगों में ग्लूटेन सेंसिटिविटी हो सकती है। खासतौर पर सीलिएक डिजीज से पीड़ित लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।

बढ़ती है गैस और पेट फूलने की समस्या

ओट्स में फाइबर भरपूर मात्रा में होता है। हालांकि फाइबर शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा फाइबर लेने पर पेट में गैस, ब्लोटिंग और असहजता महसूस हो सकती है।

फाइटिक एसिड जो पोषक तत्वों का करता है कम अवशोषण

ओट्स में फाइटिक एसिड पाया जाता है, जो शरीर में कैल्शियम, आयरन और जिंक जैसे मिनरल्स के अवशोषण में रुकावट पैदा कर सकता है। अगर लंबे समय तक बहुत ज्यादा मात्रा में ओट्स खाए जाएं तो इन पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। एक्सपर्ट के मुताबिक ओट्स को भिगोकर खाने से फाइटिक एसिड का असर कुछ कम हो सकता है।

कैलोरी ज्यादा होने का खतरा

ओट्स न्यूट्रिशन जरूर हैं, लेकिन इन्हें कैलोरी-डेंस फूड भी माना जाता है। अगर पोर्शन कंट्रोल न किया जाए तो कम मात्रा में भी ज्यादा कैलोरी शरीर में जा सकती है, जिससे वजन बढ़ने का खतरा रहता है।

न्यूट्रिएंट इंबैलेंस हो सकता है

अगर कोई व्यक्ति रोज सिर्फ ओट्स को ही ब्रेकफास्ट का हिस्सा बनाता है, तो शरीर को दूसरे जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। इसलिए डाइट में विविधता बनाए रखना जरूरी है।

ओट्स का सीमित सेवन करने से बड़े फायदे भी होते हैं

दिल की सेहत के लिए फायदेमंद

ओट्स में बीटा-ग्लूकॉन नाम का सॉल्युबल फाइबर पाया जाता है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है। इससे हार्ट डिजीज का खतरा कम हो सकता है।

वजन कंट्रोल रखने में मददगार

ओट्स पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराते हैं। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग कम होती है, जिससे वजन कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।

ब्लड शुगर कंट्रोल में सहायक

ओट्स को लो ग्लाइसेमिक फूड माना जाता है। इनमें मौजूद फाइबर ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखने में मदद कर सकता है।

पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं

फाइबर की अच्छी मात्रा होने की वजह से ओट्स पाचन को बेहतर बनाते हैं और कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। इसका सीमित सेवन पाचन के लिए उपयोगी है। 

एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर

ओट्स में कई एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन कम करने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं।

कितनी मात्रा में खाने चाहिए ओट्स?

डॉक्टर वी.के. मिश्रा के अनुसार ओट्स को हेल्दी डाइट का हिस्सा जरूर बनाया जा सकता है, लेकिन इन्हें सीमित मात्रा में खाना बेहतर रहता है। एक्सपर्ट का कहना है कि हफ्ते में दो से तीन बार किसी एक मील में ओट्स शामिल करना पर्याप्त माना जाता है। रोजाना सिर्फ ओट्स खाने के बजाय संतुलित और विविध आहार लेना ज्यादा जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। इसमें दी गई सलाह किसी डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपको पाचन, एलर्जी, सीलिएक डिजीज, डायबिटीज या किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें

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