भारत में सोने के बाद चांदी सबसे ज्यादा खरीदी जाने वाली कीमती धातु है. लेकिन अगर आप आने वाले दिनों में चांदी के गहने, सिक्के या बर्तन खरीदने का मन बना रहे हैं, तो आपको अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है. सरकार ने चांदी के आयात यानी विदेशों से इसे मंगाने के नियमों को काफी सख्त कर दिया है. इसे ‘फ्री’ लिस्ट से बाहर निकालकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ (प्रतिबंधित) सूची में डाल दिया गया है. यानी, अब बाहर से चांदी मंगाने के लिए आयातकों को सरकारी बाबूओं की पूर्व मंजूरी लेनी होगी. इस कदम का सीधा असर बाजार में चांदी की सप्लाई पर पड़ेगा, जिससे इसके दाम तेजी से ऊपर जा सकते हैं.
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सरकार ने क्यों उठाया यह सख्त कदम?
मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर सरकार को अचानक यह फैसला क्यों लेना पड़ा. दरअसल, ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था तनाव में है. इसका सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा है. जब हम बाहर से कोई भी सामान खरीदते हैं, तो उसका भुगतान डॉलर में करना होता है. सरकार की कोशिश है कि देश से कम से कम डॉलर बाहर जाए.
विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए ही यह लगाई गई है. इसी विदेशी मुद्रा को बचाने की कवायद के तहत कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी. इससे पहले सरकार सोने-चांदी पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को भी 6 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 15 फीसदी कर चुकी है.
आयात से जुड़ी नई पाबंदियों का दायरा
अब यह समझना जरूरी है कि सरकार की इस नई नीति का असर किन चीजों पर होगा. नए नियमों के मुताबिक, अब 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली सिल्वर बार बाहर से मंगाने के लिए सरकार से इजाजत लेनी होगी. इसी तरह सेमी-मैन्युफैक्चर्ड चांदी से लेकर पाउडर फॉर्म में आने वाली चांदी के लिए भी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है.
भारत अपनी जरूरत की भारी मात्रा में चांदी बाहरी देशों से ही खरीदता है, क्योंकि यहां इसका घरेलू उत्पादन काफी कम है. डॉलर की किल्लत के बीच व्यापार घाटा बढ़ने की चिंताओं ने सरकार को यह कदम उठाने पर मजबूर किया है. अब चांदी महज एक सामान्य कमोडिटी नहीं रह गई है, बल्कि इसे विदेशी मुद्रा भंडार पर असर डालने वाली एक संवेदनशील संपत्ति के तौर पर देखा जा रहा है.
सप्लाई घटने से आसमान छू सकते हैं दाम
बाजार के जानकारों का स्पष्ट मानना है कि आयातकों के लिए नई प्रक्रिया जटिल होने से घरेलू बाजार में चांदी की किल्लत हो सकती है. अगर बाजार में फिजिकल चांदी की सप्लाई घटती है, तो भारतीय बाजारों (MCX) में इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से भागेगी. ऐसी स्थिति में घरेलू बाजार में प्रीमियम भी बढ़ सकता है. तनाव के समय में यह अंतर और ज्यादा होने की आशंका है.
चांदी केवल पायल या बिछिया बनाने के काम नहीं आती. सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर से लेकर कई बड़ी मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज में इसका भारी इस्तेमाल होता है. सप्लाई चेन बिगड़ने के डर से कारोबारी बड़े पैमाने पर चांदी का स्टॉक जमा करना शुरू कर सकते हैं. मांग अचानक बढ़ने से कीमतों में बेतहाशा उछाल आने की पूरी संभावना है, जिसका अंतिम बोझ आम ग्राहक की जेब पर ही पड़ेगा.





