भारत में विमानन इतिहास की शुरुआत भले ही जेआरडी टाटा से मानी जाती हो, लेकिन आम लोगों तक हवाई सफर पहुंचाने की असली कहानी कैप्टन जी.आर. गोपीनाथ से शुरू होती है. वही गोपीनाथ जिन्होंने Air Deccan शुरू कर भारत में सस्ती हवाई यात्रा का सपना सच किया.

दिलचस्प बात यह है कि गोपीनाथ सिर्फ एयरलाइन उद्यमी नहीं थे. वे पहले भारतीय सेना में अधिकारी रहे, फिर किसान बने, राजनीति में हाथ आजमाया और कई बार असफल भी हुए. लेकिन इन्हीं अनुभवों ने उन्हें वह सोच और हिम्मत दी, जिसने भारतीय एविएशन इंडस्ट्री की तस्वीर बदल दी.
गांव से शुरू हुआ सफर
कर्नाटक के हासन जिले के छोटे से गांव गोरूर में जन्मे गोपीनाथ एक स्कूल टीचर के बेटे थे. परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था, लेकिन संस्कारों और मूल्यों में बेहद समृद्ध.
उनके पिता पढ़ाई को सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं मानते थे. वे गोपीनाथ को खेतों, नदी और गांव की जिंदगी से सीखने के लिए प्रेरित करते थे. महात्मा गांधी की आत्मकथा और सुकरात के विचारों से भी उन्हें परिचित कराया गया.
फौज में जाने की दिलचस्प वजह
जब सैनिक स्कूल की परीक्षा का मौका मिला, तो पूरी क्लास में सिर्फ गोपीनाथ ने हाथ उठाया. वजह भी मजेदार थी. गांव में ढाबों को मिलिट्री होटल कहा जाता था क्योंकि वहां सैनिक नॉन-वेज खाते थे और मजबूत दिखते थे. पिता ने कहा था कि फौज में जाओगे तो ताकतवर बनोगे. बस यही बात उनके मन में बैठ गई.
पहली बार वे परीक्षा में फेल हो गए क्योंकि पेपर अंग्रेजी में था और उन्होंने पढ़ाई कन्नड़ में की थी. बाद में दोबारा कन्नड़ में परीक्षा हुई और वे पास हो गए.
युद्ध से खेती तक का सफर
गोपीनाथ ने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) से ट्रेनिंग ली और 1971 में भारतीय सेना में अधिकारी बने. बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में भी उन्होंने हिस्सा लिया. कुछ साल बाद उन्होंने सेना छोड़ दी. उस समय उनकी तनख्वाह सिर्फ 1,350 रुपये थी और ग्रेच्युटी के तौर पर उन्हें 6,350 रुपये मिले.
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इसके बाद उन्होंने बंजर जमीन पर खेती शुरू की. सेकेंड हैंड टेंट लगाकर वहीं रहना शुरू किया और प्राकृतिक खेती व रेशम उत्पादन (Sericulture) का मॉडल तैयार किया. बिना कीटनाशक वाली खेती के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली और Rolex Award से सम्मानित किया गया.
ग्राहक की जरूरत समझकर शुरू किया कारोबार
जब उनके इलाके में Royal Enfield की डीलरशिप बंद हो गई, तो वे सीधे कंपनी के दफ्तर पहुंच गए और बोले कि आपकी ग्राहक सेवा खराब है. बाद में उन्हें खुद डीलरशिप मिल गई और उन्होंने 8 शाखाएं खड़ी कर दीं. उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा लेकिन चुनाव हार गए. तब उन्हें एहसास हुआ कि लोगों की असली मदद नौकरी पैदा करके की जा सकती है.
एक फ्लाइट ने बदल दी सोच
1990 के दशक में उन्होंने अपने पुराने फौजी दोस्त के साथ Deccan Aviation शुरू की. फिर 2002 में अमेरिका के फीनिक्स एयरपोर्ट पर Southwest Airlines की फ्लाइट में सफर करते समय उनकी सोच पूरी तरह बदल गई.
उनके बगल में बैठे एक बढ़ई ने बताया कि कम किराए की वजह से वह परिवार के साथ हवाई यात्रा कर पाता है. तब गोपीनाथ ने सोचा भारत में बढ़ई, नर्स और मैकेनिक क्यों नहीं उड़ सकते?
1 रुपये की टिकट ने मचा दिया था धमाल
25 अगस्त 2003 को Air Deccan की शुरुआत हुई. मॉडल बेहद सीधा था न फ्री खाना, न लग्जरी, सिर्फ सस्ती यात्रा. उन्होंने 1 रुपये की टिकट लॉन्च कर पूरे देश में हलचल मचा दी. लाखों लोगों ने पहली बार हवाई यात्रा का सपना देखा. कुछ ही सालों में Air Deccan की घरेलू बाजार में करीब 22% हिस्सेदारी हो गई. IndiGo, SpiceJet और GoAir जैसी एयरलाइंस भी बाद में इसी लो-कॉस्ट मॉडल पर आगे बढ़ीं.
फिर आया मुश्किल दौर
तेजी से बढ़ते कारोबार के बीच एयरलाइन पर दबाव बढ़ने लगा. 2007 में विजय माल्या की कंपनी UB Group ने Air Deccan में हिस्सेदारी खरीद ली. धीरे-धीरे Air Deccan का लो-कॉस्ट मॉडल खत्म होने लगा और उसका नाम बदलकर Kingfisher Red कर दिया गया. गोपीनाथ ने बाद में कंपनी छोड़ दी. वे आज भी इसे अपनी सबसे बड़ी गलती मानते हैं.
आज भी जारी है सफर
गोपीनाथ ने बाद में कार्गो एयरलाइन शुरू की, राजनीति में दोबारा कोशिश की और UDAN योजना के तहत Air Deccan को फिर शुरू किया. हालांकि कोरोना महामारी के दौरान वह भी बंद हो गई. आज वे किताबें लिखते हैं, युवाओं को मार्गदर्शन देते हैं और एविएशन व उद्यमिता पर अपने विचार साझा करते हैं. उनका मानना है कि इंसान की असली महानता कभी न गिरने में नहीं, बल्कि हर बार गिरकर दोबारा उठ खड़े होने में है.





