How Lord Krishna Died: भगवान कृष्ण की मृत्यु हिंदू धर्म की इतिहास के रहस्यमयी कहानियों में से एक है. आज के समय में सभी लोगों के मन ये सवाल उठता है कि आखिर भगवान कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई थी. कहा जाता है कि जब महाभारत का युद्ध खत्म हुआ तो कौरवों की माता गांधारी अपने सभी 100 पुत्रों की मौत से बहुत ज्यादा दुखी थी.

जिसका जिम्मेदार वो केशव को मानती थी. जिसके वजह से उन्होंने क्रोध में आकर माधव को श्राप दे दिया था. उन्होंने कहा कि जैसे कौरवों का वंश पूरी तरीके से खत्म हो गया, ठीक उसी प्रकार से यादव वंश का भी अंत हो जाएगा.
गांधारी का श्राप हुआ सच…
समय के साथ-साथ गांधारी का श्राप सच साबित होने लगा. हिंदू लोक कथाओं के मुताबिक द्वाराका में यादव वंश के लोगों के बीच में मतभेद बढ़ने लगे और लोग आपस में लड़ने लगे. धीरे-धीरे हालत इतनी खराब हो गई की यादव वंश पूरी तरह से खत्म हो गया. भगवान कृष्ण भी जानते थे कि अब धरती पर उनका समय पूरा हो चुका है. इसके बाद उन्होंने एकांत में जाकर ध्यान लगाना शुरू कर दिया था.
गलती से लगा था तीर..
कहा जाता है कि भगवान कृष्ण जंगल में एक पेड़ के नीचे विश्राम कर रहे थे. उसी समय जरा नाम का एक शिकारी वहां पहुंचा. दूर से उसे भगवान कृष्ण का पैर किसी हिरण जैसा दिखाई दिया. उसने बिना पहचान किए तीर चला दिया. तीर सीधे भगवान कृष्ण के पैर में जाकर लगा. जब शिकारी पास पहुंचा तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ. वो डर गया और भगवान से माफी मांगने लगा.
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रामायण से था कनेक्शन…
कथा के मुताबिक भगवान कृष्ण ने शिकारी को माफ कर दिया. उन्होंने कहा कि ये सब पहले से तय था. कई धार्मिक मान्यताओं में माना जाता है कि जरा नाम का शिकारी पिछले जन्म में बालि था. रामावतार में भगवान राम ने बालि को छिपकर तीर मारा था. उसी कर्म का फल इस जन्म में पूरा हुआ. इसलिए भगवान कृष्ण ने बिना क्रोध किए अपनी मृत्यु को स्वीकार कर लिया.
तो ये था द्वापर युग का अंत…
भगवान कृष्ण की मृत्यु के साथ ही द्वापर युग का अंत माना जाता है. इसके बाद कलियुग की शुरुआत हुई थी. यह कथा सिर्फ मृत्यु की कहानी नहीं मानी जाती. बल्कि कर्म, समय और भाग्य का संदेश भी देती है. आज भी लोग कृष्ण की मृत्यु से जुड़ी इन कथाओं को बड़े रहस्य और श्रद्धा के साथ सुनते हैं. यही कारण है कि भगवान कृष्ण से जुड़ी कहानियां सदियों बाद भी लोगों के बीच उतनी ही लोकप्रिय बनी हुई हैं.





