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गोद में ढाई साल की बेटी लेकर शिव की नगरी काशी की करती हैं सेवा, वाराणसी की सिपाही साधना के जज्बे की कहानी

Mother’s Day 2026: जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है, मां दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है… मदर्स डे उन लाखों-करोड़ों माओं के त्याग, तपस्या और बलिदान को याद करने का एक अवसर है, जिनके कारण एक स्वस्थ समाज बनता है. जिनकी वजह से हमारा वजूद है. हालांकि, हम भारतीयों के लिए तो हर दिन मां का होता है. हमने दुनिया की हर अच्छी चीज को अपनाया है और उनमें से ही एक मदर्स डे भी है.

गोद में ढाई साल की बेटी लेकर शिव की नगरी काशी की करती हैं सेवा, वाराणसी की सिपाही साधना के जज्बे की कहानी
गोद में ढाई साल की बेटी लेकर शिव की नगरी काशी की करती हैं सेवा, वाराणसी की सिपाही साधना के जज्बे की कहानी

इस मदर्स डे पर हम आपके लिए एक ऐसी मां साधना शुक्ला की कहानी लेकर आए हैं, जो कि पुलिस जैसे टफ डिपार्टमेंट में रहते हुए भी अपनी ढाई साल की बिटिया के साथ रोजाना आठ घंटे की ड्यूटी करती हैं. साधना शुक्ला छह साल पहले पुलिस विभाग में भर्ती हुईं और शादी के बाद तीन साल पहले उनकी बेटी का जन्म हुआ. पिछले ढाई साल से साधना अपनी बेटी के साथ ही ड्यूटी कर रही हैं.

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‘बेटी की मां होने की पहचान सबसे अलग’

वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट में स्थित महिला अपराध शाखा के महिला समझौता प्रकोष्ठ में अपनी ड्यूटी देने वाली सिपाही साधना शुक्ला कहती हैं कि ‘ढाई साल की बच्ची के साथ आठ घंटे की नौकरी चुनौती पूर्ण तो है, लेकिन अपने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और अपने सहयोगियों की वजह काम आसान हो गया’. साधना शुक्ला कहती हैं कि एक बेटी की मां के रूप में अपने आप को मजबूत पाती हूं. मां होने की पहचान बाकी सभी पहचानों से अलग और खास है.

बेटी के साथ निभा रही ड्यूटी

जिस महिला सहायता प्रकोष्ठ में मैं काम करती हूं. यहां रोजाना अनगिनत एप्लीकेशन आती हैं. महिलाओं की समस्याओं का निराकरण हो सके इसके लिए एक बेहतर कोआर्डिनेशन के साथ काम करना और उनके आपसी समझौते हो सके इसके लिए संवेदनशीलता के साथ अधिकारियों तक उनकी समस्याएं पहुंचना ये हम लोगों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. इसी के साथ ढाई साल की बच्ची की अतिरिक्त जिम्मेदारी इसको देख कर तो लगता है कि ईश्वर चाहते हैं कि मैं ये दोनों काम बेहतर तरीके से सकूं इसलिए उसने मुझे चुना है.

महिला अपराध शाखा

महिला अपराध शाखा की एसीपी नम्रता श्रीवास्तव कहती हैं कि हम सब आज जो कुछ भी हैं. अपनी-अपनी मां की वजह से हैं. एक स्वस्थ समाज भी एक मां की ही वजह से बनता है और जो महिलाएं पुलिस विभाग में हैं, जो 24×7 अलर्ट मोड में रहने वाला विभाग है. इस विभाग में काम करने वाली उन महिलाओं को विशेष रूप से मैं बधाई देना चाहूंगी जो परिवार और विभाग में एक संतुलन बनाकर रखती हैं.

पुलिस विभाग के साथ-साथ उन सभी विभाग की महिलाओं को भी मदर्स डे की बहुत बधाई, जो अपने विभाग की ड्यूटी और परिवार की जिम्मेदारी दोनों को बखूबी निभा रही हैं.

khabarmonkey@gmail.com

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