महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के नवापुर में बर्ड फ्लू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और आम जनता के बीच चिंता पैदा कर दी है। नवापुर में पिछले दो दशकों में तीसरी बार हुए बर्ड फ्लू प्रकोप से हालात गंभीर बने हुए हैं। प्रशासन H5N1 वायरस के इंसानों में फैलने की आशंका को देखते हुए निगरानी, संक्रमित पक्षियों को मारने और अस्पतालों की तैयारी तेज कर रहा है। संक्रमण के पोल्ट्री से इंसानों तक पहुंचने की संभावनाओं को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि वायरस के कुछ स्ट्रेन, खासकर H5N1, कभी-कभी इंसानों को भी संक्रमित कर सकते हैं और गंभीर बीमारी पैदा कर सकते हैं। वायरस के तेजी से म्यूटेट होने की क्षमता वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा रही है। इस गंभीर स्थिति पर डॉक्टरों का मानना है कि सही जानकारी और समय पर सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
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चिकन और अंडा दो ऐसे फूड्स है जिसे ज्यादातर लोग खाना पसंद करते हैं, लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या बर्ड फ्लू के प्रकोप के चलते अंडा और चिकन खाना सुरक्षित विकल्प है, क्या अंडा और चिकन खाने से भी बर्ड फ्लू फैल सकता है? जनसत्ता की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए डॉक्टरों की दी गई गाइडलाइन्स और सुरक्षा के सभी मानक।
बर्ड फ्लू क्या है?
एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस (H5 Avian Influenza Virus) जिसे आम भाषा में बर्ड फ्लू भी कहा जाता है। ये एक प्रकार का इन्फ्लूएंजा वायरस है जो खासतौर पर पक्षियों को संक्रमित करता है और पक्षियों के माध्यम से इंसानों तक पहुंचता है। ये एक वायरल संक्रमण है और खासतौर से मुर्गियों, बतखों और जंगली पक्षियों को प्रभावित करता है। इसके कुछ स्ट्रेन, विशेष रूप से H5N1, कभी-कभी इंसानों में भी संक्रमण फैला सकते हैं। यह वायरस एक RNA वायरस है जो Influenza Type A समूह का हिस्सा है। H5 का मतलब है कि वायरस में Hemagglutinin (H) नामक प्रोटीन का 5वां प्रकार मौजूद है जो सबसे खतरनाक प्रकारों में से एक है। ये वायरस मौत का कारण बन सकता है।
बर्ड फ्लू इंसानों को कैसे संक्रमित करता है?
डॉ. विनय सोनेवाने के अनुसार बर्ड फ्लू संक्रमित पोल्ट्री, दूषित सतहों या कुलिंग ऑपरेशन के दौरान इंसानों में फैल सकता है। संक्रमित पक्षियों को संभालने वाले लोग सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं, इसलिए निगरानी और शुरुआती इलाज बेहद जरूरी है। संक्रमण आमतौर पर संक्रमित पक्षियों की लार, मल, पंख या पोल्ट्री फार्म और लाइव बर्ड मार्केट जैसे दूषित वातावरण के सीधे संपर्क से होता है। वायरस आंख, नाक या मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है, या संक्रमित धूल और बूंदों को सांस के साथ अंदर लेने से भी संक्रमण हो सकता है। हालांकि ये वायरस इंसानों के बीच आसानी से नहीं फैलता। यही वजह है कि अब तक बड़े पैमाने पर इंसानोंं में संक्रमण नहीं हुआ है।
इंसानों में संक्रमण होने पर क्या होता है?
डॉ. सोनेवाने बताते हैं कि वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद मुख्य रूप से श्वसन तंत्र पर हमला करता है। शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं, जिनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, थकान और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं। डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि संक्रमण तेजी से गंभीर हो सकता है। गंभीर मामलों में निमोनिया हो सकता है, जिसमें फेफड़ों में सूजन और पानी भर जाता है, जिससे ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होती है। कुछ मरीजों में Acute Respiratory Distress Syndrome (ARDS) जैसी जानलेवा परेशानी हो सकती है, जिसमें वेंटिलेटर और ICU की जरूरत पड़ती है।
बर्ड फ्लू का बॉडी के जरूरी अंगों पर असर
दुर्लभ मामलों में बर्ड फ्लू कई अंगों को प्रभावित कर सकता है, जिससे किडनी फेलियर, लिवर खराब होना या न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं हो सकती हैं।
वैज्ञानिक क्यों चिंतित हैं?
वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता वायरस की म्यूटेट होने की क्षमता है। फिलहाल H5N1 जैसे स्ट्रेन इंसानों के बीच तेजी से नहीं फैलते, लेकिन इन्फ्लूएंजा वायरस तेजी से बदलने के लिए जाने जाते हैं। अगर वायरस में ऐसा बदलाव आ गया जिससे यह इंसानों से इंसानों में आसानी से फैलने लगे, तो विशेषज्ञों का मानना है कि यह महामारी का रूप ले सकता है। खासकर उन इलाकों में जहां पोल्ट्री फार्म ज्यादा हैं और इंसान-पशु संपर्क लगातार होता है।
वैक्सीनेशन क्या जरूरी है?
भारत सरकार के 2025 के बयान के अनुसार, फिलहाल सिर्फ कम खतरनाक स्ट्रेन H9N2 के लिए वैक्सीन की अनुमति है, जबकि अत्यधिक खतरनाक एवियन इन्फ्लूएंजा के लिए वैक्सीनेशन पर अभी विचार चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा वैक्सीन पूरी सुरक्षा नहीं देती और इससे बीमारी की पहचान और निगरानी प्रभावित हो सकती है।
लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
- विशेषज्ञों ने लोगों को बीमार या मृत पक्षियों के सीधे संपर्क से बचने और पोल्ट्री उत्पादों को संभालते समय साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दी है।
- मुर्गी का मांस और अंडों को अच्छी तरह पकाकर खाना चाहिए, क्योंकि सही तापमान पर पकाने से वायरस नष्ट हो जाता है।
- डॉ. सोनेवाने ने लोगों से कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाई गई सावधानियों जैसी सतर्कता बरतने को कहा। उन्होंने सलाह दी है कि लोग मास्क पहनें, सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें, फ्लू जैसे लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों से बचें और संक्रमित पोल्ट्री से दूरी बनाए रखें।
- पोल्ट्री फार्म और कुलिंग ऑपरेशन में लगे कर्मचारियों को दस्ताने, मास्क और PPE किट जैसे सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने की सलाह दी गई है ताकि संक्रमण का खतरा कम किया जा सके।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): लेख के अंत में एक मेडिकल डिस्क्लेमर अवश्य दें कि “यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है और लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लें।
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