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Harbhajan Singh Birthday: ट्रक ड्राइवर बनने चले थे भज्जी, Sourav Ganguly के एक फैसले ने बनाया ‘Turbanator’​

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज स्पिनर और ‘टर्बनेटर’ के नाम से मशहूर हरभजन सिंह 03 जुलाई को अपना 46वां जन्मदिन मना रहे हैं। हरभजन सिंह को यह नाम ऐसे ही नहीं मिला। दरअसल, वह सिख हैं और सिर पर पगड़ी पहनते हैं। अंग्रेजी में इसको टर्बन कहा जाता है। जब हरभजन सिंह के सामने […]

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज स्पिनर और ‘टर्बनेटर’ के नाम से मशहूर हरभजन सिंह 03 जुलाई को अपना 46वां जन्मदिन मना रहे हैं। हरभजन सिंह को यह नाम ऐसे ही नहीं मिला। दरअसल, वह सिख हैं और सिर पर पगड़ी पहनते हैं। अंग्रेजी में इसको टर्बन कहा जाता है। जब हरभजन सिंह के सामने ऑस्ट्रेलियाई टीम बेबस नजर आने लगी, तो मीडिया ने उनको भज्जी को ‘टर्बनेटर’ नाम दिया। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर हरभजन सिंह के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…

जन्म और परिवार

पंजाब के जालंधर शहर में 03 जुलाई 1980 को हरभजन सिंह का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम सरदार सरदेव सिंह और मां का नाम अवतार कौर है। साल 2000 में पिता के निधन के बाद हरभजन सिंह ने अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाली थी।

क्रिकेट करियर

हरभजन सिंह को बचपन से ही क्रिकेट का जुनून था। घरेलू स्तर पर अपनी फिरकी का जादू दिखाने के बाद उनको राष्ट्रीय टीम ने बुला लिया। मार्च 1998 में 17 साल की उम्र में हरभजन सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच खेलकर अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरूआत की। शुरूआती मैचों में उन्होंने अपनी प्रतिभा दिखाई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की डगर उनके लिए आसान नहीं थी।

ट्रक ड्राइवर बनने की सोच रहे थे हरभजन

क्रिकेट करियर की शुरूआत के करीब डेढ़ साल बाद खराब प्रदर्शन की वजह से उनको टीम से बाहर कर दिया गया। वहीं साल 2000 में पिता के निधन के बाद वह बुरी तरह से टूट गए। एक ओर टीम से निकल जाने का दर्द और दूसरी ओर परिवार की गंभीर आर्थिक स्थिति ने उनको परेशान कर दिया। हरभजन सिंह की परेशानी इस कदर बढ़ी की वह अमेरिका में ट्रक ड्राइवर बनने का मन बना चुके थे।

टर्निंग प्वाइंट

लेकिन भज्जी की बहनों ने इस मुश्किल दौर में उनके अंदर के क्रिकेटर को मरने नहीं दिया। परिवार के विश्वास के दम पर भज्जी ने रणजी ट्रॉफी में वापसी की और इस सीजन में शानदार गेंदबाजी करते हुए 28 विकेट लिए।

ऐतिहासिक कमबैक

साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया टीम भारत के दौरे पर थी। वहीं टीम के तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली ने भज्जी पर भरोसा जताया और उनको टीम में शामिल करने के लिए कहा। गांगुली का यह फैसला भारतीय क्रिकेट के इतिहास को बदलने वाला साबित हुआ। ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज के 3 मैचों में भज्जी ने कंगारू बल्लेबाजों को बेबस करते हुए 32 विकेट चटकाए। कोलकाता टेस्ट में हरभजन सिंह ने शानदार हैट्रिक ली। यह टेस्ट क्रिकेट में किसी भारतीय गेंदबाद द्वारा ली गई पहली हैट्रिक थी। इस सीरीज ने हरभजन सिंह के क्रिकेट करियर को फिर से जीवंत कर दिया।
हरभजन सिंह सिर्फ टेस्ट के नहीं बल्कि सीमित ओवरों के भी किंग थे। वह भारत की दो सबसे बड़ी ऐतिहासिक जीतों साल 2007 का टी20 वर्ल्ड कप और साल 2011 के वनडे वर्ल्ड कप विजेता टीम में प्रमुख सदस्य रहे।
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