Wednesday, April 29, 2026
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‘…तो जल जाएगी बहू’, गृह प्रवेश से पहले सासू मां ने क्यों ली दुल्हन की अग्निपरीक्षा? दहकते अंगारों पर नंगे पांव चलवाया

Raigarh News: आपने अक्सर देखा होगा कि भारत में कई तरह की अनोखी शादियां होती हैं. कई जगह तो परंपराएं इतनी अजीब होती हैं, जिनपर यकीन कर पाना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसी ही परंपरा गंधेल गोत्र में निभाई जाती है. यहां शादी के बाद गृहप्रवेश से पहले दूल्हा-दुल्हन को दहकते अंगारों पर चलाया जाता है. इसके पीछे कई तरह के तर्क दिए जाते हैं. सभी तर्कों में से एक ऐसा भी तर्क है जो आपको बेहद अटपटा लगेगा. ये तर्क है- अगर दुल्हन ने मायके में कोई नुकसान करवाया होगा तो वो अंगारों में जल जाएगी.

‘…तो जल जाएगी बहू’, गृह प्रवेश से पहले सासू मां ने क्यों ली दुल्हन की अग्निपरीक्षा? दहकते अंगारों पर नंगे पांव चलवाया
‘…तो जल जाएगी बहू’, गृह प्रवेश से पहले सासू मां ने क्यों ली दुल्हन की अग्निपरीक्षा? दहकते अंगारों पर नंगे पांव चलवाया

बिलासपुर गांव के जयप्रकाश राठिया की शादी बाड़ादरहा गांव की पुष्पा राठिया के साथ संपन्न हुई. 27 अप्रैल को जब दुल्हन विदा होकर ससुराल पहुंची, तो उसके स्वागत की तैयारी किसी आम शादी से बिल्कुल अलग थी. दूल्हे के पिता मेहत्तर राठिया ने बताया कि बहू के घर आने तक परिवार का कोई भी सदस्य अन्न का दाना तो दूर, पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करता. पूरे परिवार का यह कड़ा निर्जला व्रत बहू के गृह प्रवेश के बाद ही टूटता है.

बैगा का नृत्य और आग की सेज

परंपरा के अनुसार, घर के मंडप को चारों तरफ से कपड़ों से ढक दिया गया. इसके बाद गांव के बैगा (पुजारी) ने पूजा-अर्चना की. लोक मान्यताओं के अनुसार, जब बैगा पर देवता सवार होते हैं, तब चूल्हे से दहकते हुए लाल अंगार लाकर मंडप के बीचों-बीच बिछा दिए जाते हैं. पहले बैगा खुद उन अंगारों पर नाचते हैं और फिर दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे का हाथ थामकर उन्हीं अंगारों के ऊपर से सात फेरे लेते हैं.

‘कुछ गलत हुआ तो जल जाएगी बहू’

ग्रामीणों और बुजुर्गों का मानना है कि यह रस्म एक प्रकार की अग्निपरीक्षा है. समाज में यह धारणा है कि यदि बहू अपने मायके से कुछ नुकसान करके आई होगी या अपवित्र होगी, तो अंगार उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं. लेकिन यदि वह पवित्र है, तो उसे आंच तक नहीं आएगी. परिवार का मानना है कि अंगारों पर चलने से जोड़ा जीवन की बड़ी से बड़ी कठिनाइयों को मिलकर सहने की शक्ति प्राप्त कर लेता है.

बलि प्रथा और मंदिर की अनिवार्य पूजा

इस रस्म के दौरान दो बकरों की बलि देने की भी परंपरा है. साथ ही, बारात के प्रस्थान और आगमन के समय गांव के प्राचीन शिव मंदिर में पूजा करना अनिवार्य माना जाता है. जयप्रकाश और पुष्पा ने भी इसी परंपरा का पालन करते हुए महादेव का आशीर्वाद लिया और फिर अंगारों पर चलकर अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत की. हैरानी की बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान दूल्हा-दुल्हन को कोई शारीरिक चोट नहीं पहुंची. फिलहाल, सोशल मीडिया पर इस अग्निपरीक्षा वाली शादी की चर्चा जोरों पर है.

khabarmonkey@gmail.com

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