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Mehandipur Balaji Tourist Spots: मेहंदीपुर बालाजी के पास 100 किलोमीटर के दायरे में घूमने की जगहें, ऐसे करें इन्हें एक्सप्लोर

राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी को भारत के सबसे बड़े तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है. ये मंदिर दौसा जिले में मौजूद भगवान हनुमान का प्रसिद्ध मंदिर है. कहते हैं कि हनुमान जी यहां बाल रूप में विराजित हैं. इंदर मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले नेगेटिव एनर्जी से अपने बचाव की भगवान से कामना करते हैं. माना जाता है कि यहां भूत-प्रेत जैसी बाधाओं का इलाज होता है और इसी वजह से ये एक चर्चित धार्मिक स्थल है. वैसे बालाजी के प्रसाद को लेकर भी कई मिथक लोगों में पॉपुलर हैं. अधिकतर लोग अपनी मनोकामना के लिए यहां आते हैं और सीधे घर लौट जाते हैं.

Mehandipur Balaji Tourist Spots: मेहंदीपुर बालाजी के पास 100 किलोमीटर के दायरे में घूमने की जगहें, ऐसे करें इन्हें एक्सप्लोर
Mehandipur Balaji Tourist Spots: मेहंदीपुर बालाजी के पास 100 किलोमीटर के दायरे में घूमने की जगहें, ऐसे करें इन्हें एक्सप्लोर

बहुत कम लोग होते हैं जो यहां दर्शन के बाद आसपास के टूरिस्ट स्पॉट्स को एक्सप्लोर करते हैं. इस आर्टिकल में हम आपको बालाजी से 100 किलोमीटर के दायरे में मौजूद टूरिस्ट लोकेशन के बारे में बताने जा रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं….

मेहंदीपुर बालाजी के पास मौजूद टूरिस्ट स्पॉट्स

भानगढ़ का किला

राजस्थान की रहस्यमय जगहों में से एक भानगढ़ का किला पहाड़ों के बीच बनी हुई एक खूबसूरत ऐतिहासिक इमारत है. मानसून के दौरान ये किला पहाड़ों की हरियाली से घिर जाता है. ये नजारा अपने आप में दीवाना बना देता है. खास बात है कि बालाजी मंदिर से ये सिर्फ 40 किलोमीटर दूर है. यहां पहुंचने के लिए आपको आगरा-जयपुर हाईवे पर ड्राइव करना होगा. वैसे लोकल ट्रांसपोर्ट के जरिए भी भानगढ़ पहुंचा जा सकता है. भानगढ़ के लिए कहा जाता है कि यहां रात में रुका नहीं जा सकता. इसलिए यहां आने वाले टूरिस्ट दिन के उजाले में ही किले को विजिट करके लौट जाते हैं.

आभानेरी, बांदीकुई

दौसा की ऐतिहासिक जगहों में एक नाम आभानेरी का भी जिसे यहां एक पुरानी चांद बावड़ी के रूप में जाना जाता है. कहते हैं कि इसे 1900 साल में पहले चौहान वंश के राजाओं ने बनवाया था. ये पूरे एशिया महाद्वीप की सबसे पुरानी स्टेप वेल मानी जाती है. आप यहां बालाजी मंदिर से पहुंचना चाहते हैं तो आपको सिर्फ 30 किलोमीटर की रोड यात्रा करनी होगी. शाम के समय यहां तस्वीरें खींचने की बात ही अलग है. इस जगह के लिए कहा जाता है कि यहां आई एक पूरी बारात गायब हो गई थी. राजस्थान की प्राचीन इमारतों को देखने के शौकीन हैं तो यहां जरूर जाना चाहिए.

माता हर्षत का मंदिर

आभानेरी यानी चांद बावड़ी के पास ही एक ऐतिहासिक मंदिर मौजूद है जो माता हर्षत को समर्पित है. ये मेहंदीपुर बालाजी से सिर्फ 24 किलोमीटर दूर है. कहते हैं कि ये मंदिर एक समय पर काफी बुरे वक्त से गुजरा था. क्योंकि इसे मुस्लिम शासकों ने बर्बाद करने का प्रयास किया था. अब ये मंदिर एक खंडहर के रूप में पड़ा हुआ है. बड़े आंगन के साथ खूबसूरत मूर्तियां और स्तंभों की नक्काशी यहां आने वालों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है.

माधोगढ़ किला

राजस्थान को किलो का गढ़ भी कहा जाता है. यहां एक माधोगढ़ किला भी मौजूद है जिसे राजा माधव सिंह ने बनवाया था. इस किले की मंदिर से दूरी सिर्फ 83 km है और यहां पहुंचने के लिए करीब 1.3 घंटा लगता है. इस पुराने किले को अब एक शाही होटल में तब्दील कर दिया गया है. इस किले को भव्य निर्माण टूरिस्ट को खूब पसंद आता है.

सरिस्का नेशनल पार्क

वैसे आप राजस्थान में नेचर को करीब से जानना चाहते हैं या फिर पहाड़ी इलाकों की ट्रिप को एंजॉय करना चाहते हैं तो आपको सरिस्का नेशनल पार्क जाना चाहिए. इसकी बालाजी मंदिर से दूरी करीब 100 किलोमीटर है. सरिस्का नेशनल पार्क में सफारी को एंजॉय किया जा सकता है और यहां रात में खानपान भी बड़ा शानदार होता है. दिल्ली से सरिस्का की दूरी भी 150 किलोमीटर है.

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