ईरान युद्ध की वजह से BRICS में आम सहमति बनाना मुश्किल हो गया है और भारत के लिए यह एक तरह का धर्म संकट बन गया है. इस साल भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और उसे सभी देशों को साथ लेकर चलना है. इस समूह में भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका के साथ ईरान और UAE समेत कुल 11 देश शामिल हैं.

समस्या यह है कि BRICS के कुछ सदस्य देश खुद ही पश्चिम एशिया के संघर्ष में शामिल हैं, इसलिए एक साझा बयान बनाना कठिन हो गया है. हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में ईरान और UAE के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली. चाहता है कि BRICS उसके समर्थन में बयान जारी करे, जबकि UAE मांग कर रहा है कि ईरान के हमलों की निंदा की जाए.
3 दिन पहले हुई थी मीटिंग
रूस और चीन को ईरान के पक्ष में माना जा रहा है, जबकि अन्य देश संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं. भारत किसी भी पक्ष में जाने से बच रहा है, क्योंकि उसे सभी देशों के बीच संतुलन बनाए रखना है. दिल्ली में 24 अप्रैल 2026 को BRICS के डिप्टी विदेश मंत्रियों और विशेष दूतों की बैठक हुई, जिसमें मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा हुई. इस बैठक में सभी देशों ने चिंता जताई, लेकिन कोई साझा बयान जारी नहीं हो सका.
ऐसी स्थिति में भारत को चेयर स्टेटमेंट जारी करना पड़ा. यह एक ऐसा बयान होता है, जिसे मेजबान देश जारी करता है, लेकिन उस पर सभी देशों की सहमति नहीं होती. चर्चा में फिलिस्तीन मुद्दा, गाजा की स्थिति, मानवीय सहायता, UNRWA की भूमिका, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, लेबनान में युद्धविराम, सीरिया के पुनर्निर्माण, यमन-इराक-लीबिया की राजनीतिक स्थिति और सूडान के संकट जैसे कई मुद्दे शामिल रहे.
ईरान ने हमले की निंदा की मांग की थी
इससे पहले मार्च में ईरान ने भारत से कहा था कि BRICS की ओर से अमेरिका और इजराइल के हमलों की निंदा वाला बयान जारी किया जाए. इससे भारत के लिए स्थिति और मुश्किल हो गई, क्योंकि वह किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं करना चाहता.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा कि कुछ सदस्य देश इस संघर्ष में सीधे शामिल हैं, इसलिए आम सहमति बनाना मुश्किल हो रहा है. भारत सभी देशों से बातचीत कर रहा है और समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है.
अगले महीने विदेश मंत्रियों की मीटिंग
आगे 14-15 मई को BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक भारत में हो सकती है, जिसमें चीन के विदेश मंत्री वांग यी और रूस के सर्गेई लावरोव शामिल होंगे. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी हालात के अनुसार वर्चुअली जुड़ सकते हैं.





