रविवार शाम को प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और उनके कैबिनेट सदस्यों की ओर से अपनी संपत्ति का ब्योरा पब्लिक किया गया है. शाह कैबिनेट ने भले ही पूरानी सरकार से अलग पदभार ग्रहण करने के एक महीने से भी कम समय में अपनी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक कर दिया हो, लेकिन इसने आम जनता के बीच और आलोचना को जन्म दिया है.

कैबिनेट सदस्यों की निजी संपत्ति जिसमें, जमीन, सोना, नकदी, शेयर बाजार में निवेश और वाहन शामिल हैं. न्यूज और सोशल मीडिया, दोनों जगह बहस और विवाद का विषय बन गई हैं. नेपाल के भ्रष्टाचार कानून के तहत सरकार पद हासिल करने वालों के लिए पदभार ग्रहण करने के 60 दिनों के भीतर अपनी संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य है, लेकिन इसे सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं है.
सोमवार को छात्रों के एक समूह ने विरोध प्रदर्शन करते हुए यह मांग की कि सार्वजनिक रूप से घोषित संपत्तियों के स्रोतों का खुलासा किया जाए और एक निष्पक्ष जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि मंत्रियों ने यह धन कैसे कमाया है. बता दें, नेपाल सरकार के भ्रष्टाचारों के खिलाफ हुए जैन-जी प्रदर्शनों के बाद बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनाया गया है. उन्होंने दूसरे नेताओं से अलग हटकर गैर VIP सुविधाएं लेने वाले एक नेता के तौर पर खुद को स्थापित किया है, लेकिन संपत्ति खुलासे के बाद उन पर कई तरह के आरोप लगने शुरू हो गए हैं.
कितने है बालेन्द्र शाह की संपत्ति?
दी गई जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री शाह के बैंक खाते में 14.6 मिलियन जमा हैं और आय के स्रोतों में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म (जैसे Facebook और YouTube) से होने वाली कमाई को बताया गया है. उनके पास काठमांडू, धनुषा और महोत्तरी जिलों में घर और जमीन है. इसके अलावा, उन्होंने अन्य कीमती चीज़ों के साथ-साथ 190 तोला पुश्तैनी सोना होने की भी घोषणा की है.
मंत्रियों पर भी खूब दौलत
इसी तरह उनके वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने 19 मिलियन के शेयर निवेश और लगभग 9 मिलियन की बैंक जमा राशि का खुलासा किया है. उनके पास ललितपुर में 20 मिलियन का एक रिहायशी घर और कई जगहों पर 107.5 मिलियन की जमीन भी है. उनकी संपत्ति के स्रोत पेशेवर आय और पुश्तैनी संपत्ति हैं.
गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने 43.1 मिलियन के शेयर निवेश, तीन ज़िलों में जमीन और 89 तोला सोने का जिक्र किया है. संपत्ति के विवरण की घोषणा ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ के तहत एक अनिवार्य प्रावधान है, जिसके मुताबिक प्रधानमंत्री और मंत्रियों को पदभार संभालने के 60 दिनों के भीतर अपनी संपत्ति का विवरण जमा करना होता है. इतने बड़े पैमाने पर संपत्ति से लोगों में चिंता बढ़ गई है.





