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Asha Bhosle Last Promise: निधन से 15 दिन पहले नाटक देखने पहुंची थीं आशा भोसले, फैंस से किया ये वादा रह गया अधूरा

Asha Bhosle Last Public Appearance: आशा भोसले के साथ भारतीय संगीत जगत का एक सुनहरा अध्याय समाप्त हो गया है. सुरों की जादूगरनी, करोड़ों दिलों की धड़कन और सात दशकों तक अपनी आवाज़ से दुनिया को मंत्रमुग्ध करने वाली आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं. पूरा देश शोक में डूबा है, लेकिन इन सबके बीच सोशल मीडिया पर आशा ताई का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. ये वीडियो उनके निधन से महज 15 दिन पहले का है, जिसे अब उनका ‘आखिरी पब्लिक अपीयरेंस’ माना जा रहा है, हालांकि इस मंच पर उन्होंने नाटक देखने आए दर्शकों से जो वादा किया था, वो अधूरा रह गया.

Asha Bhosle Last Promise: निधन से 15 दिन पहले नाटक देखने पहुंची थीं आशा भोसले, फैंस से किया ये वादा रह गया अधूरा
Asha Bhosle Last Promise: निधन से 15 दिन पहले नाटक देखने पहुंची थीं आशा भोसले, फैंस से किया ये वादा रह गया अधूरा

की ये आखिरी झलक जितनी खास थी, उतनी ही भावुक भी. वे विलेपार्ले स्थित दीनानाथ मंगेशकर नाट्यगृह में मराठी नाटक ‘भ्रमाचा भोपला‘ देखने पहुंची थीं. गौरतलब है कि ये थिएटर उनके लिए बेहद खास था, क्योंकि ये उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर के नाम पर ही बना है. शायद यही वजह है कि वो अपने घर से लगभग 1 से डेढ़ घंटे का सफर तय करते हुए लोअर परेल से विले पार्ले आईं. जिस जगह की ईंट-ईंट में उनके पिता की यादें बसी थीं, वहीं आशा ताई ने अपनी आखिरी सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज कराई.

संजय नार्वेकर की मुरीद थीं आशा ताई

वीडियो में देखा जा सकता है कि ढलती उम्र और गिरती सेहत के बावजूद आशा ताई के चेहरे पर वही पुरानी चमक और मुस्कान थी. इस नाटक में ‘‘ में डेढ़ फूट्या का किरदार निभाने वाले एक्टर संजय नार्वेकर मुख्य भूमिका निभा रहे थे. नाटक खत्म होने के बाद जब आशा भोसले को मंच पर आमंत्रित किया गया, तब उन्होंने बड़े ही सरल और मजाकिया अंदाज में अपनी बात रखी.

उन्होंने कहा, “मैं संजय के काम की बहुत बड़ी फैन हूं. वे जब बोलते हैं, तो उनकी आवाज़ में एक गजब का ठहराव और कंट्रोल होता है. वे चिल्लाते नहीं हैं, लेकिन उनकी बात सीधे दिल तक पहुंचती है.” उन्होंने ये भी शेयर किया कि वे कई सालों बाद घर से बाहर कोई नाटक देखने निकली थीं.”

डर गए थे संजय नार्वेकर

मंच पर बोलते हुए आशा ताई ने एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया. उन्होंने बताया, “मैंने किसी से संजय का नंबर लिया और उन्हें फोन किया. मैंने उनसे कहा कि मैं आपसे मिलना चाहती हूं. संजय घबरा गए, उन्हें लगा कि आशा ताई ने अचानक फोन क्यों किया? मैं तो गाना भी नहीं गाता, फिर क्या बात होगी? लेकिन मैंने उनसे कहा कि मैं बस एक प्रशंसक के नाते उनसे मिलना चाहती हूं.” इस दौरान उन्होंने कहा था कि एक समय पर उन्होंने बहुत सारे नाटक देखे थे. लेकिन अब सालों बाद ये उनका पहला नाटक था, साथ ही उन्होंने दर्शकों के सामने ये भी कहा था कि आगे से वो जरूर नाटक देखने आएंगी, लेकिन उनका ये वादा अधूरा रह गया. ‘भ्रमाचा भोपला’ उनका देखा हुआ आखिरी नाटक साबित हुआ.

पर्दे के पीछे छिपी थी एक गहरी विदाई

इस वीडियो को आज जब फैंस देख रहे हैं, तो उनकी आंखें नम हैं. वीडियो में आशा ताई ने वादा किया था कि वे अब अक्सर नाटक देखने आया करेंगी, लेकिन किसे पता था कि यह उनकी आखिरी सार्वजनिक झलक होगी. व्हाइट साड़ी और पिंक शॉल में लिपटी आशा ताई उस दिन मंच पर एक कलाकार नहीं, बल्कि एक उत्साही दर्शक बनकर आई थीं.

एक युग का अंत

आशा भोंसले ने अपने करियर में 12,000 से अधिक गाने गाए. ‘दम मारो दम’ से लेकर ‘इन आंखों की मस्ती’ तक, उनकी रेंज का कोई मुकाबला नहीं था. लता दीदी के जाने के बाद वे मंगेशकर परिवार का सबसे मजबूत स्तंभ थीं. आज जब उनकी सुरीली आवाज खामोश हो गई है, तब दीनानाथ मंगेशकर थिएटर की वे खाली कुर्सियां शायद आज भी उनकी उस आखिरी मुस्कान को याद कर रही होंगी.

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