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गद्दार, बेईमान और धोखेबाज; उद्धव की बैठक से गायब MP पर उखड़े संजय राउत, दी गाली​

नई दिल्ली: शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने गुरुवार को महत्वपूर्ण बैठक में अनुपस्थित रहे अपने ही पार्टी के बागी लोकसभा सांसदों पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने अपशब्दों का भी प्रयोग किया, जो हम यहां नहीं लिख सकते हैं। पत्रकारों से बात करते हुए संजय राउत ने उन्हें ‘गद्दार’, ‘बेईमान’ और ‘धोखेबाज’ […]

नई दिल्ली: शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने गुरुवार को महत्वपूर्ण बैठक में अनुपस्थित रहे अपने ही पार्टी के बागी लोकसभा सांसदों पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने अपशब्दों का भी प्रयोग किया, जो हम यहां नहीं लिख सकते हैं। पत्रकारों से बात करते हुए संजय राउत ने उन्हें ‘गद्दार’, ‘बेईमान’ और ‘धोखेबाज’ जैसे शब्दों से नवाजा। दरअसल, पार्टी द्वारा सभी सांसदों की उपस्थिति अनिवार्य करने वाला सख्त तीनपंक्ति व्हिप जारी करने के बावजूद केवल तीन सांसद ही बैठक में पहुंचे, जिससे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना में फूट की अटकलें तेज हो गई हैं।

संसदीय बैठक समाप्त होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए संजय राउत ने अनुपस्थित सांसदों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये सांसद पार्टी के साथ घोर विश्वासघात कर रहे हैं और विद्रोह के रास्ते पर चलकर पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। राउत का गुस्सा इस कदर भड़का कि उन्होंने स्पष्ट रूप से इशारा किया कि ऐसे बागी तत्वों को अब पार्टी में कोई जगह नहीं मिलेगी।

एक दिन पहले भी किया था तीखा हमला
यह घटना ठीक एक दिन बाद आई है, जब संजय राउत ने दलबदलुओं पर पहले ही तीखा हमला बोला था। उस दौरान उन्होंने विभिन्न टीवी चैनलों और पत्रकारों से खास अपील की थी कि उनके इस्तेमाल किए गए कड़े शब्दों को सेंसर न किया जाए। राउत ने कहा था कि काटो मत, प्रसारित करो। बाद में अपने शब्द चयन का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसे शब्द आमतौर पर इस्तेमाल होते हैं और उन्हें पूरी तरह पता है कि कब और कहां किस भाषा का प्रयोग करना उचित है।

दोतिहाई बहुमत की ओर बढ़ते कदम?
शिवसेना में बढ़ती अंदरूनी अस्थिरता को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में जोरों पर चर्चा है कि पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी में हैं। दोतिहाई बहुमत हासिल करने के लिए यह संख्या पर्याप्त मानी जा रही है, जिससे पार्टी के आधिकारिक चिन्ह और नाम पर एक और बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

ऑपरेशन टाइगर की चर्चा तेज
दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम को टऑपरेशन टाइगरट का नाम दिया जा रहा है। यह 2022 के उस बड़े विद्रोह की याद दिलाता है, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 40 से ज्यादा विधायकों ने उद्धव ठाकरे सरकार के खिलाफ बगावत कर दी थी, जिसके परिणामस्वरूप शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी। अब लोकसभा सांसदों के स्तर पर इसी तरह की बगावत की आशंका जताई जा रही है।

शिवसेना के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी सभी सांसदों को बारबार संदेश दे रही है कि वे एकजुट रहें, लेकिन कुछ सांसदों की चुप्पी और अनुपस्थिति पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गई है। उद्धव ठाकरे गुट अब इस स्थिति पर नजर रखे हुए है और आंतरिक बैठकें कर रहा है ताकि किसी बड़े दलबदल को रोका जा सके।

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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