Dhirendra Shastri Controversy: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उनका एक वीडियो शेयर किया है। इसमें धीरेंद्र शास्त्री कथित तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं कि ‘राम जी के पांच बाप थे’। इस वीडियो को लेकर अखिलेश ने नाराजगी जताई और उनके सभी कार्यक्रम रद्द करने की मांग की।

ये सनातन विरोधी किसके कहने पर सक्रिय है। पहले भगवान कृष्ण के बारे में विवादित वीडियो आया अब भगवान राम के पिता के बारे अभद्रता की बात प्रसारित हो रही है। इसके राजनीतिक आकाओं को ये सब मंजूर होगा, हमें अंश मात्र भी स्वीकार्य नहीं है।
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— Akhilesh Yadav November 3, 2026
सपा सुप्रीमो ने की कार्यक्रम रद्द करने की मांग
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि ये सनातन विरोधी किसके कहने पर सक्रिय है। पहले भगवान कृष्ण के बारे में विवादित वीडियो आया अब भगवान राम के पिता के बारे अभद्रता की बात प्रसारित हो रही है। सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के अपराध में इसके सभी कार्यक्रम रद्द किए जाएं। अब सच्चे सनातनी इनकी पर्ची लिखेंगे।
धरती पर कोई सनातनी चुप क्यों है ?
सपा सुप्रीमो अखिलेश ने अपने बयान में भी धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सुनने में आ रहा है आपको और हमको कि बाबा विश्वनाथ की धरती पर कोई सनातनी चुप क्यों है। एक बाबा हैं जो अपमानित कर रहे हैं। पहले प्रभु श्री कृष्णा को अपमानित किया और अब सुनने में आया है कि प्रभु श्री राम के पिता जी का अपमान कर रहे हैं।
कृष्ण पर टिप्पणी से भी हुआ था विवाद
इससे पहले धीरेंद्र शास्त्री भगवान कृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी के कारण विवादों में आए थे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वह भगवान राम और कृष्ण की तुलना करते हुए कृष्ण के खड़े होने के अंदाज, कमर और गर्दन की मुद्रा और बांसुरी बजाने को लेकर टिप्पणी करते सुनाई दिए थे। इस मामले में सांसद पप्पू यादव ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए संसद मार्ग थाने का रुख किया था।
धीरेंद्र शास्त्री ने दी थी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने भाव में ठाकुर जी को उलाहना दिया था। उनके मुताबिक, वीडियो का आधा हिस्सा देखकर उन्हें कृष्ण विरोधी बताया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि उनका मकसद भगवान राम और कृष्ण में भेद पैदा करना नहीं था। दोनों एक ही हैं और उनमें कोई अंतर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि फिर भी हमारी बात या भाव से किसी को ठेस पहुंची हो तो हम क्षमा प्रार्थी हैं।