बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमतों में 700 रुपए की तेजी आई और यह 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. रुपये में आई गिरावट के कारण ऐसा हुआ, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले ग्लोबल लेवल पर सोनेचांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ था. स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्ध सोने की कीमत 700 रुपये बढ़कर 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई. मंगलवार को यह 1,45,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था.

वहीं, चांदी की कीमत 1.98 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 21 पैसे कमजोर होकर 95.28 पर बंद हुआ. डॉलर के मजबूत होने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण रुपये पर दबाव पड़ा. व्यापारियों ने बताया कि रुपये में गिरावट से सोने के आयात की लागत बढ़ गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी के बावजूद घरेलू कीमतों को समर्थन मिला.
क्या कहते हैं जानकार
HDFC सिक्योरिटीज में कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में बहुत कम उतारचढ़ाव देखने को मिला. निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का इंतजार कर रहे थे, जो कीमती धातुओं के बाजार के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण घटना है. ग्लोबल मार्केट्स में, स्पॉट गोल्ड 14.05 डॉलर गिरकर 4,046.28 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी 1.23 प्रतिशत गिरकर 53.75 डॉलर प्रति औंस पर रही. मिरे एसेट शेरखान में कमोडिटीज के प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा, “बुधवार को विदेशी बाजारों में स्पॉट गोल्ड 4,040 डॉलर प्रति औंस के आसपास रहा. सऊदी अरब की रास तानूरा तेल रिफाइनरी पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है.
क्या आ सकती है गोल्ड की कीमतों में गिरावट?
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में कमोडिटीज और करेंसी की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नारवेकर के अनुसार, निवेशक आज आने वाले अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमिटी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि ऐसी व्यापक उम्मीद है कि फेड दरों को स्थिर रखेगा, लेकिन बाजार के प्रतिभागियों को अभी भी साल के अंत से पहले दरों में बढ़ोतरी की आशंका है, क्योंकि ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई बनी हुई है.
नारवेकर ने बताया कि गोल्डबैक्ड एक्सचेंजट्रेडेड फंड जिन्होंने अगस्त के बाद आई गिरावट के दौरान भी खरीदारी जारी रखी थी अब वहां से निकासी देखी जा रही है. अगर केंद्रीय बैंक की खरीदारी में काफी बढ़ोतरी नहीं होती है, तो इससे कीमतों में और गिरावट आ सकती है. उन्होंने आगे कहा कि मांग के मोर्चे पर, चीनी परिवारों ने कीमतों में गिरावट का फायदा उठाकर खरीदारी की है, जबकि भारतीय खरीदार त्योहारी सीजन से पहले यह सोचकर इंतजार कर रहे हैं कि कीमतें और गिर सकती हैं.