मुंबई। फिल्मों की सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर बॉलीवुड में बहस तेज हो गई है। फिल्म निर्देशक हनी त्रेहान ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की नई गाइडलाइंस पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फिल्म ‘सतलुज’ के निर्देशक का कहना है कि नए दिशानिर्देशों से फिल्मकारों की रचनात्मक स्वतंत्रता और अपनी बात कहने के अधिकार पर असर पड़ सकता है।

नई गाइडलाइंस पर उठाए सवाल
हनी त्रेहान ने सीबीएफसी के नए नियमों को लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज की वास्तविकताओं, समस्याओं और संवेदनशील मुद्दों को सामने रखने का एक प्रभावशाली जरिया भी है। ऐसे में यदि फिल्मों पर जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध लगाए जाते हैं, तो फिल्मकारों के लिए अपनी बात खुलकर दर्शकों तक पहुंचाना मुश्किल हो सकता है।
अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर चिंता
निर्देशक ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व पर सवाल उठाते हुए यह मुद्दा उठाया कि आखिर फिल्मकारों को किस हद तक अपनी रचनात्मक सोच के अनुसार कहानियां प्रस्तुत करने की छूट मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि सिनेमा में अलगअलग विचारों और सामाजिक मुद्दों को जगह मिलना जरूरी है।
फिल्म इंडस्ट्री में फिर छिड़ सकती है बहस
सीबीएफसी की गाइडलाइंस को लेकर हनी त्रेहान की प्रतिक्रिया ऐसे समय सामने आई है, जब फिल्मों की सेंसरशिप, कटौती और रचनात्मक आजादी को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। फिल्मकारों के लिए एक तरफ कानूनी और प्रमाणन संबंधी नियमों का पालन जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ दर्शकों तक बिना अनावश्यक हस्तक्षेप के अपनी कहानी पहुंचाना भी अहम है।
अब देखना होगा कि सीबीएफसी की नई गाइडलाइंस पर फिल्म इंडस्ट्री की ओर से आगे कैसी प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं और इस मुद्दे पर सेंसर बोर्ड का क्या रुख रहता है।