बुधवार, 4 नवंबर 2026 ब्रेकिंग
UP वालों के लिए खुशखबरी! धनतेरस से छठ तक नहीं कटेगी बिजली, गांव से शहर तक 24 घंटे सप्लाई​ | Lucknow Cylinder Transporters Strike: लखनऊ में सिलेंडर ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, 80 गैस एजेंसियों पर सप्लाई प्रभावित​ | तेज नजर, शातिर शिकारी… क्या उल्लू वाकई में बेवकूफ होते हैं? जानें क्या कहता है विज्ञान​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

पेट्रोल के निर्यात पर टैक्स खत्म, डीजल व विमान ईंधन भेजना हुआ महंगा​

Petrol Diesel Export Duty: केंद्र सरकार ने देश से बाहर भेजे जाने वाले ईंधन यानी फ्यूल एक्सपोर्ट के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है. वित्त मंत्रालय की तरफ से शनिवार को जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक, सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह से खत्म […]

Petrol Diesel Export Duty: केंद्र सरकार ने देश से बाहर भेजे जाने वाले ईंधन यानी फ्यूल एक्सपोर्ट के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है. वित्त मंत्रालय की तरफ से शनिवार को जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक, सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह से खत्म कर दिया है. दूसरी तरफ, डीजल और विमान के ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल को विदेश भेजने पर लगने वाले टैक्स में बढ़ोतरी कर दी गई है. सरकार का ये कदम ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई और कीमतों पर बुरा असर पड़ा है.

डीजल पर 3 रुपये तो एटीएफ पर 50 पैसे बढ़ा टैक्स

वित्त मंत्रालय के नए आदेश के बाद अब पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर कोई ड्यूटी नहीं लगेगी. इससे पहले पेट्रोल को बाहर भेजने पर 2.50 रुपये प्रति लीटर का टैक्स लगता था, जिसे अब घटाकर शून्य कर दिया गया है. वहीं डीजल की बात करें तो इसके निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी में सीधे 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया है. पहले डीजल के एक्सपोर्ट पर 8.50 रुपये प्रति लीटर टैक्स लगता था, जो अब बढ़कर 11.50 रुपये प्रति लीटर हो गया है. इसके अलावा विमान ईंधन के निर्यात पर भी टैक्स 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ाया गया है. एटीएफ पर लगने वाली ड्यूटी अब 10.50 रुपये से बढ़कर 11 रुपये प्रति लीटर हो गई है.

मार्च के में क्यों शुरू हुआ था ये टैक्स?

सरकार ने एक्सपोर्ट ड्यूटी का ये नियम मार्च के आखिरी हफ्ते में लागू किया था. उस वक्त मिडिल ईस्ट में बढ़े सैन्य तनाव की वजह से दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई गड़बड़ा गई थी. इस संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी तेजी से ऊपर चली गई थीं. जब विदेशी बाजारों में तेल के दाम बढ़ते हैं, तो तेल रिफाइनरी कंपनियों को बाहर तेल बेचने में ज्यादा मुनाफा दिखता है. सरकार का साफ मकसद था कि ज्यादा मुनाफे के चक्कर में रिफाइनरी कंपनियां घरेलू ग्राहकों को छोड़कर विदेशी बाजारों को प्राथमिकता न देने लगें. इसी वजह से निर्यात पर ये टैक्स लगाया गया था.

होर्मुज रूट में रुकावट से बदला भारत का गणित

पश्चिम एशिया में ये जंग शुरू होने से पहले, भारत अपनी जरूरत के कुल कच्चे तेल का करीब 45 फीसदी हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते मंगाता था. ये एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी को दुनिया के बाकी बाजारों से जोड़ता है. युद्ध की वजह से जब इस रास्ते से होने वाली व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में रुकावट आई, तो भारत को मजबूर होकर कच्चा तेल खरीदने के लिए दूसरे अलगअलग विकल्पों की तलाश करनी पड़ी.

घरेलू ग्राहकों को महंगाई के झटके से बचाने की कोशिश

ताजा बदलाव ऐसे वक्त में किया गया है जब भारत पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के असर से लगातार निपटने की कोशिश कर रहा है. इस संकट ने न सिर्फ कच्चे तेल की सप्लाई को अस्थिर किया है, बल्कि समुद्री जहाजों के आनेजाने का जोखिम भी बढ़ा दिया है. इसकी वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं. हालांकि, भारतीय सरकार ने देश के आम लोगों को इस वैश्विक झटके से बचाने के लिए घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम स्थिर रखे हैं. इसके साथ ही सरकार एक्सपोर्ट ड्यूटी को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है, ताकि ये तय किया जा सके कि रिफाइनरी कंपनियां देश से बाहर कितना ईंधन भेजेंगी.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY